ਚੁੱਪ ਰਹਿਣਾ ਸਿੱਖ ਲਿਆ
ਦੁੱਖ ਸਹਿਣਾ ਸਿੱਖ ਲਿਆ
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾ ਅਸੀਂ ਇਕੱਲੇ ਰਹਿਣਾ ਸਿੱਖ ਲਿਆ
Chup rehna sikh liya
dukh sehna sikh liya
tere bina asin ikale rehna sikh liya
ਚੁੱਪ ਰਹਿਣਾ ਸਿੱਖ ਲਿਆ
ਦੁੱਖ ਸਹਿਣਾ ਸਿੱਖ ਲਿਆ
ਤੇਰੇ ਬਿਨਾ ਅਸੀਂ ਇਕੱਲੇ ਰਹਿਣਾ ਸਿੱਖ ਲਿਆ
Chup rehna sikh liya
dukh sehna sikh liya
tere bina asin ikale rehna sikh liya
हमने डूबते सूरज की एक शाम को अपना किरदार बदल डाला,
के उस मोहब्बत की चुभन को शायरी का नजमा दे डाला,
लोग मेरी तकरीरों पर वाह वाही दे रहे थे,
भीड़ में कुछ लोग ताली बजाकर, तो कुछ लोग अपनी नाकाम मोहब्बत की दलील दे रहे थे।
महफिल के शोर से एक जानी पहचानी सी आवाज आई,
तू आज भी आगे नहीं बढ़ा की उसने गुहार लगाई,
उसकी इस शिकायत में परवान था पुराने यारो का ।
मै हैरान था कौन था यह शक्स
अनजानों की भीड़ में जिसने मेरे शब्दो में छुपी नाकाम मोहब्बत को पहचाना था,
मुस्कुराता हुआ सामने आया तब समझ आया अरे यह तो यार पुराना था।
Sawli si wo makhmal ke jaisa man ho.Dil pathar Or pyar v ho sawli si wo ,
dikhta hai chamak unke bhi chere par . Jo man ne ko tyar hi ni pyar bhi ho sawli si wo.