
Ikk tu rahe kol nahio lod sab di..!!
Tere jeha yaar milaya ohne reham kar k
Khide mathe sawikar kara daat rabb di..!!

कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
Mei apni tadap kuch yun bayan karti hu ki
hum yaha aapse baat karne ko marr rahe hain
aur aap gumshuda hokar kahin beparwah bethe honge💔💔💔
मैं अपनी तड़प कुछ यूँ बयान करती हूँ
हम यहाँ आपसे बात करने को मर रहे हैं
और आप गुमशुदा होकर कहीं बेपरवाह बैठे होंगे💔💔💔