
jihnu byaan karn lai saadhiyaan akhaan
hungaara na bharn

उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..
है वो मेरी मोहब्बत की रूह, इसलिए पास मेरे वो रहती है..
मुझे पागल समझेगी ये दुनिया, तभी वो कुछ ना कहती है..
सुबह उठे साथ में वो मेरे, शाम आंखों के साथ वो ढलती है..
वो जी ना सकी जो साथ मेरे, तो मरके साथ में चलती है..
राहें तो बदल गयीं उसकी मगर, राहौं से मुडी वो रहती है..
मेरी रूह से जुडना है हक उसका, तभी साथ जुडी वो रहती है..
हर खुशी बांटती है मेरी, हर गम मेरे संग सहती है..
मुझे वो लगती है अपनी, और मुझे वो अपना कहती है….