दवा असर न करे तो नजर उतारती है
दुनिया के उसूलों से कब वो हारती है
क्या लिखूं “”मां”” के लिए उसने खुद मुझे लिखा है
खुदा को देखने की कब चाह है उसका स्वरूप हमेशा मेरी मां में दिखा है💞
दवा असर न करे तो नजर उतारती है
दुनिया के उसूलों से कब वो हारती है
क्या लिखूं “”मां”” के लिए उसने खुद मुझे लिखा है
खुदा को देखने की कब चाह है उसका स्वरूप हमेशा मेरी मां में दिखा है💞
Ke ab hum jaanbujhkar tumhe yaad nhi karte
Tere khato se bhi chedchaad nhi karte🙃
Subah uth tere photo bhi nhi dekhte
Ab hum baat mein bhi teri baat nhi karte 💔
कि अब हम जानबूझकर तुम्हे याद नही करते
तेरे खतो से भी छेड़छाड़ नही करते🙃
सुबह उठ तेरे फोटो भी नही देखते
अब हम बात में भी तेरी बात नही करते💔
मेरे हिस्से आई अब तक कोई सुबह या शाम नही!
मैं उसकी दीवाना हूँ और एक पल को आराम नही!
सुबह सवाली बन जाती है रात डराती है मुझकों!
याद उसे करती हूँ केवल और मुझे कुछ काम नही!!
हर्ष ✍️