
Vo samne bhi nahi aate fir bhi deedar ho jata hai..!!

toot jaoon mohabbat mein ya phir toot kar mohabbat karun,
is baar mere paas bas ik yaheen raasta hain…
टूट जाऊँ मोहब्बत में या फिर टूट कर मोहब्बत करुँ,
इस बार मेरे पास बस इक यहीं रास्ता हैं….
दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला
अब इसे लोग समझते हैं गिरफ्तार मेरा
सख्त नदीम है मुझे दाम में लाने वाला
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे इस से
वो जो इक शख्स है मुंह फेर के जाने वाला
मुन्तज़िर किस का हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं
कौन आएगा यहाँ कौन है आने वाला
मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख्वाब की ताबीर बताने वाला