
Vo samne bhi nahi aate fir bhi deedar ho jata hai..!!
Enjoy Every Movement of life!

Mzak ate paisa kaafi soch samaj ke udauna chahide ✌
ਮਜ਼ਾਕ ਅਤੇ ਪੈਸਾ ਕਾਫੀ ਸੋਚ ਸਮਝ ਕੇ ਉਡਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦੈ ✌
तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।

