
Evein dukhan ch zind na pa sajjna..!!
Deewane tere da haal e ki
Kade taan puch ke ja sajjna..!!

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे तेरी मर्जी के मुताबिक नज़र आयें कैसे घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो की इस घर को बचाएं कैसे क़हक़हा आँख का बर्ताव बदल देता है हंसने वाले तुझे आंसू नज़र आयें कैसे कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा एक कतरे को समंदर नज़र आयें कैसे लाख तलवरे झुकी अती हो गरदन की तरफ सर झुकाना नहीं आता तो झुकाएं कैसे
Kya hua jo abb tu mere saath nahi hai,
Ab pehle jaisa din aur raat nahi hai
is baat ka malaal nahi hai mujhe, malaal to yeh hai
ki abb jeene me woh bachpan wali baat nahi hai
क्या हुआ जो अब तु मेरे साथ नहीं है,
अब पहले जैसा दिन और रात नहीं है,
इस बात का मलाल नहीं है मुझे, मलाल तो ये है,
की अब जीने में वो बचपन वाली बात नहीं है।
– विक्रम