Dhundli jehi kismat dhundle jehe supne
supne hi reh gaye o
supne hi supne ….
ਧੁੰਦਲੀ ਜਿਹੀ ਕਿਸਮਤ ਧੁੰਦਲੇ ਜਿਹੇ ਸੁਪਨੇ
ਸੁਪਨੇ ਹੀ ਰਹਿ ਗਏ ਉ
ਸੁਪਨੇ ਹੀ ਸੁਪਨੇ ….
TaJpreet kaur
Dhundli jehi kismat dhundle jehe supne
supne hi reh gaye o
supne hi supne ….
ਧੁੰਦਲੀ ਜਿਹੀ ਕਿਸਮਤ ਧੁੰਦਲੇ ਜਿਹੇ ਸੁਪਨੇ
ਸੁਪਨੇ ਹੀ ਰਹਿ ਗਏ ਉ
ਸੁਪਨੇ ਹੀ ਸੁਪਨੇ ….
TaJpreet kaur
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”
saanu taa pyaar de do lafaz v nahi naseeb
par badnaam iss tarah haa asi
jis tarah eh ishq saade toh hi shuru hoeyaa howe
ਸਾਨੂੰ ਤਾਂ ਪਿਆਰ ਦੇ ਦੋ ਲਫਜ਼ ਵੀ ਨਹੀਂ ਨਸੀਬ
ਪਰ ਬਦਨਾਮ ਇਸ ਤਰਾਂ ਹਾਂ ਅਸੀਂ
ਜਿਸ ਤਰਾਂ ਇਹ ਇਸ਼ਕ ਸਾਡੇ ਤੋਂ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ ਹੋਵੇ..!