
Siftaan nahi c chahidiyaan jisnu
na chahidi c gam di bochhad
us agg de jaan magron
o ronda balnn
vekh dhus dhus ke, ajh khak ho gya

Siftaan nahi c chahidiyaan jisnu
na chahidi c gam di bochhad
us agg de jaan magron
o ronda balnn
vekh dhus dhus ke, ajh khak ho gya
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
Suno
भर के लबों से जाम
बज्म मैं छलकाए जाते है
और सितम तो देखिए
एक कतरे के लिए इरफान
को तरसाए जाते है