सोलह बसंत पार हुए तो बेटी स्यानी हो जाती है!
गाँव,घर,गली,मुहल्ले मे एक कहानी हो जाती है!
ध्यान से रखना आप सब इस अनमोल रत्न को!
पांव गर फिसले तो मुश्किल जिंदगानी हो जाती है!!
हर्ष ✍️
Enjoy Every Movement of life!
सोलह बसंत पार हुए तो बेटी स्यानी हो जाती है!
गाँव,घर,गली,मुहल्ले मे एक कहानी हो जाती है!
ध्यान से रखना आप सब इस अनमोल रत्न को!
पांव गर फिसले तो मुश्किल जिंदगानी हो जाती है!!
हर्ष ✍️
Yaar beli ohne sare khaas rakhe ne ,
Menu v jaano vadh chaunda aw,
J oh ohdi jaan ne te menu v oh apni rooh smjda aw ,
हर जमाने में मुझे सिर्फ वही एक जमाना याद आया..
ये जमाना भी इस जमाने में उस जमाने के बाद आया..
बचपन के उस जमाने में, हम जो जमाना जिया करते थे..
ये जमाना उस जमाने जैसा नहीं, उस जमाने में जमाने का जो स्वाद आया..