Likhan waaleyaa ho ke dyaal likh de
ik likhi na maa baap da vichhodha
Hor Bhawe dukh hazaar likh de
ਲਿਖਣ ਵਾਲਿਆ ਹੋ ਕੇ ਦਿਆਲ ਲਿਖ ਦੇ
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਚ ਮੇਰੇ ਮਾਾਂ ਬਾਪ ਦਾ ਪਿਆਰ ਲਿਖ ਦੇ
ਇੱਕ ਲਿਖੀ ਨਾ ਮਾਂ ਬਾਪ ਦਾ ਵਿਛੋੜਾ
ਹੋਰ ਭਾਵੇ ਦੁੱਖ ਹਜ਼ਾਰ ਲਿਖ ਦੇ
सुना है लोग तुझे आँखें भरकर देखते हैं , है मन में क्या उनके ये तो सवाल कर ।
माना लोगों की फितरत अब अच्छी नहीं , अपनी इज्जत का तू तो ज़रा ख्याल कर ।।
बादस्तूर चलती रही नाराजगी जिंदगी में , वक्त बेवक्त काफिर सा न मेरा हाल कर ।
मेरी आदतों में शूमार है तेरी मोहब्बत का सबब , खुदा का शुक्र मना बेवजह न मलाल कर ।।
बागी मिजाज़ रहा दिल का चाहतों के गुबार में , जिससे कभी मोहब्बत थी उससे अब नफरत भी बेमिसाल कर ।
क्या हुआ जो दुआ भी कुबूल न हुई , हासिल कर अपने दर्द को कुछ तो अब बवाल कर ।।