Dil kurlaunda c bthera ..hnju rukde nhi c mere
Jdon oh eh keh k shdd gye k asi kabil nhi ha tere
Dil kurlaunda c bthera ..hnju rukde nhi c mere
Jdon oh eh keh k shdd gye k asi kabil nhi ha tere
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…
Awe nai koi jagda raata nu
parda roohi kitaban nu
koi satt tan laghi e tainu zaroor dila
ਐਂਵੇਂ ਨਈ ਕੋਈ ਜਾਗਦਾ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ
ਪੜਦਾ ਕੋਈ ਰੂਹੀ ਕਿਤਾਬਾਂ ਨੂੰ
ਕੋਈ ਸੱਟ ਤਾਂ ਲੱਗੀ ਏ ਤੈਨੂੰ ਜ਼ਰੂਰ ਦਿਲਾ