Dil zara na rukeya❤️
Tere agge firda jhukeya🙇♀️
Sadi taan sunda kakh nhi🙉
Hun tera hi ho chukkeya😘..!!
ਦਿਲ ਜ਼ਰਾ ਨਾ ਰੁਕਿਆ❤️
ਤੇਰੇ ਅੱਗੇ ਫਿਰਦਾ ਝੁਕਿਆ🙇♀️
ਸਾਡੀ ਤਾਂ ਸੁਣਦਾ ਕੱਖ ਨਹੀਂ🙉
ਹੁਣ ਤੇਰਾ ਹੀ ਹੋ ਚੁੱਕਿਆ😘..!!
Dil zara na rukeya❤️
Tere agge firda jhukeya🙇♀️
Sadi taan sunda kakh nhi🙉
Hun tera hi ho chukkeya😘..!!
ਦਿਲ ਜ਼ਰਾ ਨਾ ਰੁਕਿਆ❤️
ਤੇਰੇ ਅੱਗੇ ਫਿਰਦਾ ਝੁਕਿਆ🙇♀️
ਸਾਡੀ ਤਾਂ ਸੁਣਦਾ ਕੱਖ ਨਹੀਂ🙉
ਹੁਣ ਤੇਰਾ ਹੀ ਹੋ ਚੁੱਕਿਆ😘..!!
अब कोरोना हवा में।
जो सांस बंद कर के रहते है, सिर्फ वह ही बच पाएंगे।
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कोरोना कोई रोग नहीं, सिर्फ एक भ्रम।
कलि की पाप को सामने लाए सत्य का धर्म।
…
मुर्ख राजा को सलाम करते है, इसलिए पंडित को नहीं पहचान पते।
पंडित सब को अच्छे तरह जानते है- वह मुर्ख को उपेक्षा करते है और राजा को थोड़ा नाचाते।
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क्षमता राजा के हाथ में, व्यापारी के पास पैसा, बुद्धि पंडित के पास और ग़रीब हवा में।
कवि मुक्ति का सांस लेने की कोशिश करते हज़ार ज़ुल्म में ।
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प्यार कानून की तरह अँधा होता।
उच्च नीच, अच्छा बुरा, हार जीत, पाप पुण्य वह नहीं मानता।
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प्यार में विचारधारा नहीं होता।
सब विचार जहां मिल जाता, वहां प्यार जन्म लेता।
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कभी कभी दिल टूट जाते है, लेकिन विश्वास बदलता नहीं।
वह विजयी होते है, जो अपने विचार में सही।
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आपका विचार आपके पास, वह दूसरे का धन नहीं।
दूसरे का विचार दूसरे के पास, उसमें आपका कोई हिस्सा नहीं।
मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब राहो में मेरे साथ हो तुम।
मुझे नहीं चाहिए दौलत सूरत
मेरी इक बस अरमान हो तुम।
बंजर पड़ी मेरी ज़िंदगी को
शोभन करे वो बरसात हो तुम।
मेरी कौफ सी काली रातो को
रोषण करे वो चांद हो तुम।
मेरा दिन बन जाता लबो पे आते
वो खुदा सुनहरा नाम हो तुम।
मेरी हर मुश्किल को चीर के आगे
वो धनुष से निकला बान हो तुम।
मेरी हर दर्द को दुर करे
मलहम सा लगा बाम हो तुम।
मुझे क्या जरूरत किसी ऑर सक्स की
जब हर लम्हों में साथ हो तुम।
मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब रहो में मेरे साथ हो तुम।
जो तन को पल में सीतल कर दे
वो सुबह की पहली आजन हो तुम।
जो सह ले हर करवी बाते
वो मधुर मीठी मुस्कन हो तुम।
जो राहत से भितम गरमी से
वो पेरो की ठंडी छाओ हो तुम।
खोल दे आखे सही वक्त पे
वो शोर करती आलार्म हो तुम।
मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब रहो में मेरे साथ हो तुम।।