
Nazuk jeha dil c Tod ke rakh ditta e..!!

कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…
Gawache hoye haan teriyan yaadan vich😇
Khayalan 👉sadeyan ch tu vi khoh ja😍 ve..!!
Asi taan ho gye tere sajjna😘
Hun tu vi 🤗sada ho ja 😍ve..!!
ਗਵਾਚੇ ਹੋਏ ਹਾਂ ਤੇਰੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਵਿੱਚ😇
ਖ਼ਿਆਲਾਂ 👉ਸਾਡਿਆਂ ‘ਚ ਤੂੰ ਵੀ ਖੋਹ ਜਾ 😍ਵੇ..!!
ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਹੋ ਗਏ ਤੇਰੇ ਸੱਜਣਾ😘
ਹੁਣ ਤੂੰ ਵੀ🤗 ਸਾਡਾ ਹੋ ਜਾ😍 ਵੇ..!!