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Dil vich jazbaat || punjabi shayari

ਅੱਖਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਿਖਕੇ ਤੈਨੂੰ
ਤੱਕਦਾ ਰਹਿੰਨਾ ਮੈਂ

ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਦੱਬੇ ਜੋ ਜਜ਼ਬਾਤ ਮੇਰੇ
ਤੈਨੂੰ ਕਲਮ ਰਾਹੀ ਕਹਿੰਦਾ ਮੈਂ

ਮਿੱਸ ਕਰਦਾ ਤੈਨੂੰ ਜਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ
ਉੱਠਦਾ ਤੇ ਬਹਿੰਦਾ ਮੈਂ

ਕੋਈ ਸ਼ਬਦ ਨੀ ਕਿ ਭਾਈ ਰੂਪੇ ਵਾਲਾ ਦੱਸ ਸਕੇ
ਪ੍ਰੀਤ ਤੇਰੀ ਹਰ ਪਲ ਦੂਰੀ ਕਿੱਦਾ ਸਹਿੰਦਾ ਮੈਂ❤️

Title: Dil vich jazbaat || punjabi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


बेटियाँ /बेटी पर कविता || betiya || hindi poetry on daughters

रिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ
घर की रौनक, उदासियों में खिलखिलाहट
अंधियारे में उजियारा होती हैं बेटियाँ..
जीवन डगर की बेशकीमती सौगात होती हैं ये बेटियाँ।
 
निश्छल मन के भावों से ओतप्रोत
चिलचिलाती धूप में भी शीतल छांव होती हैं बेटियाँ
उम्र के हर पड़ाव में, हर सुख-दुख में,
माता-पिता की परछाई होती हैं ये बेटियाँ।
 
जग कहे पराया धन बेटी को
पर इंद्रधनुष के सात रंगों की तरह
कभी मां, कभी बहन..
ना जाने कितने रिश्तों में बंध जाती हैं ये बेटियाँ।
 
जब हर रिश्ते साथ छोड़ जाते हैं
तब पूर्ण समर्पण से अडिग साथ खड़ी रहती हैं ये  बेटियाँ
मां की ममता में पली,पिता के गर्व में लिपटी
स्वर्ग से उतरी परी होती हैं ये बेटियाँ।
 
परिवार को एक डोर में पिरोकर रखती हैं ये बेटियाँ
कम नहीं ये किसी से..
यूं समझ लो – बेमिसाल होती हैं बेटियाँ
रिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ।।

Title: बेटियाँ /बेटी पर कविता || betiya || hindi poetry on daughters


अकेले चले जाते हो || Hindi Love poem – Shayari

अकेले चले जाते हो
बताते भी नहीं हो

बातें दिल में रखते हो
सुनाते भी नहीं हो

अपने राज छुपाए रखते हो
हमारे जान लेते हो

भीड़ में होकर भी
लापता से रहते हो

जो सवाल पूछो तो
नजरे चुराते हो

स्टेटस भी देखते हो
और देखकार मुस्कुरा भी देते

जाने किस रोज को रुके हो
फोन लगाते भी नहीं हो

हमारा दर्द भी समझते हो
फिर भी नसमझ सा बनते हो

कभी बहुत अपनापन जताते हो
और कभी पराए हो जाते हो

बाला की ख़ूबसूरत हो
पर इतराते नहीं हो

वैसे तो हर लिबास में हसीन हो
पर पीली कुर्ती में बिजलियाँ गिराते हो

मशहूर होकर भी गुमनाम सा रहते हो
ताजगी सुबह की हैं पर मस्तानी शाम सा रहते हो

बांधते हो और फिर खोल देते हो
इन जुल्फों से बड़ा खेलते हो

चेहरे की किताब के अक्षरों में उलझाते हो
अब बोल भी दो दिल की बात क्यों हमारे जख्मों को सहलाते हो

मैं तो सामने से नहीं बोल पाऊंगा
डरता हूं तुम्हारी ना हुई तो नहीं झेल पाऊंगा

अब तुम भी तो कभी कुछ इशारों को समझो
किसी चंचल नांव की तरह लहरें से उलझो

अब जब कभी तुमसे अगली मुलाकात हो
इधर-उधर की नहीं सीधे मुद्दे की बात हो

फिर जो भी फैसला आए हमें मंजुर हो
इकरार हो या ना हो पर अब इजहार तो जरूर हो।

इजहार तो जरूर हो।
इजहार तो जरूर हो।

Title: अकेले चले जाते हो || Hindi Love poem – Shayari