Do din ki zindagani hai,
Phir bhi isme jeena hamari bezubani hai.
Do din ki zindagani hai,
Phir bhi isme jeena hamari bezubani hai.
दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला
अब इसे लोग समझते हैं गिरफ्तार मेरा
सख्त नदीम है मुझे दाम में लाने वाला
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे इस से
वो जो इक शख्स है मुंह फेर के जाने वाला
मुन्तज़िर किस का हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं
कौन आएगा यहाँ कौन है आने वाला
मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख्वाब की ताबीर बताने वाला
Beparwah ho izzatan nu
Kise khunje na la lawi🙌..!!
Niwe ho ho dekhi kite
Kadran na gawa lawi🙏..!!
ਬੇਪਰਵਾਹ ਹੋ ਇੱਜ਼ਤਾਂ ਨੂੰ
ਕਿਸੇ ਖੂੰਜੇ ਨਾ ਲਾ ਲਵੀਂ🙌..!!
ਨੀਵੇਂ ਹੋ ਹੋ ਦੇਖੀਂ ਕਿਤੇ
ਕਦਰਾਂ ਨਾ ਗਵਾ ਲਵੀਂ🙏..!!