meri barbaadi de do kal
ik kal jo kade auna nahi
te dujha kal jo jehan chon kade jaana nai
ਮੇਰੀ ਬਰਬਾਦੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਦੋ ਕੱਲ
ਇਕ ਕੱਲ ਜੋ ਕਦੇ ਆਉਣਾ ਨਹੀ
ਤੇ ਦੂਜਾ ਕੱਲ ਜੋ ਜ਼ਹਿਨ ਚੋਂ ਕਦੇ ਜਾਣਾ ਨਹੀਂ
meri barbaadi de do kal
ik kal jo kade auna nahi
te dujha kal jo jehan chon kade jaana nai
ਮੇਰੀ ਬਰਬਾਦੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਦੋ ਕੱਲ
ਇਕ ਕੱਲ ਜੋ ਕਦੇ ਆਉਣਾ ਨਹੀ
ਤੇ ਦੂਜਾ ਕੱਲ ਜੋ ਜ਼ਹਿਨ ਚੋਂ ਕਦੇ ਜਾਣਾ ਨਹੀਂ
Teri khamoshi mujhko kr rahi khamosh hai,
jane tujhe kya hua hai aur kya mera dosh hai,
mai khud se puchu kai swaaal ki kyu tu madhosh hai,
tu premika thi fir kyu sab jaan k bhi bihosh hai..
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए