Do Shabd Tasalli Ke Nahi Milte Iss Shahar Mein,
Log Dil Mein Dimaag Liye Firte Hain.
दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए फिरते हैं।
Do Shabd Tasalli Ke Nahi Milte Iss Shahar Mein,
Log Dil Mein Dimaag Liye Firte Hain.
दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए फिरते हैं।
बरसातों में शब भर भीगे भोर के मंज़र प्यासे हैं!
हमने जो भी गढ़े प्यार के सारे पैकर प्यासे हैं!
एक नशा सा घोल रहे हैं सबके मन मे ये लेकिन!
पढो़ गौर से इन नज्मों के सारे अक्षर प्यासे हैं!!
हर्ष✍️