“Don’t desire happiness because it creates only unhappiness and nothing else”
“Live Free Live Happy”
“Don’t desire happiness because it creates only unhappiness and nothing else”
“Live Free Live Happy”
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।
ਦਿਲੋਂ ਤਾਂ ਨੀਂ ਭੁੱਲਦੇ ਤੈਨੂੰ ਪ੍ਰੀਤ ਤੂੰ ਬਚਪਨ ਮੇਰੇ ਦੀ ਆੜੀ ਨੀ
ਜੋ ਕੀਤਾ ਤੂੰ ਸਹਿਣ ਨਾ ਹੋਵੇ ਕੀਤੀ ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਨਾਲ ਮਾੜੀ ਨੀ
ਚਾਰ ਚੁਫੇਰਾ ਮਾਖੌਲ ਉਡਾਉਦਾ ਲੱਗੇ ਪਿਆਰ ਮੇਰੇ ਦਾ
ਲੱਗਦਾ ਲੋਕ ਜਿਵੇ ਹੱਸਦੇ ਮੇਰੇ ਤੇ ਮਾਰ ਮਾਰ ਕੇ ਤਾੜੀ ਨੀ
ਇੱਝ ਲੱਗਦਾ ਜਿਵੇ ਤੂੰ ਲਾਬੂ ਲਾਕੇ ਗੁਰਲਾਲ ਭਾਈ ਰੂਪੇ ਵਾਲੇ ਦੀ ਅਰਥੀ ਸਾੜੀ ਨੀ💔