बचपन में किसी स्कूल में दाखिल नही हुए,
इसलिए जिन्दगी की दौड़ के काबिल नही हुए.
ख़ुशी खिलौना खेलने से नही मिलती है,
ख़ुशी स्कूल के दोस्तों के साथ खेलने से मिलती है.
बचपन में किसी स्कूल में दाखिल नही हुए,
इसलिए जिन्दगी की दौड़ के काबिल नही हुए.
ख़ुशी खिलौना खेलने से नही मिलती है,
ख़ुशी स्कूल के दोस्तों के साथ खेलने से मिलती है.
Bhut kuch sikha hai tootey hoye sapno se🥀…
kuch gairon se,kuch apno se😊..
वो खुशियों की डगर, वो राहों में हमसफ़र,
वो साथी था जाना पहचाना,
दिल हैं उसकी यादों का दीवाना
वो साथ था जाना पहचाना
गम तो कई उसने भी देखे,
पर राहों में चले खुशियों को लेके
दिल चाहता हैं हर दम हम साथ चलें,
पर इस राह में कई काले बादल हैं घने
वो साथ था जाना पहचाना
मेरे आसुओं को था जिसने थामा,
मुझसे ज्यादा मुझको पहचाना
चारों तरफ था घनघोर अँधियारा,
बनकर आया था जीवन में उजियारा
वो साथ था जाना पहचाना
गिन-गिन कर तारे भी गिन जाऊ,
पर उसकी यादों को भुला ना पाऊ
कहता था अक्सर हर दिन हैं मस्ताना,
हर राह में खुशियों का तराना
वो साथ था जाना पहचाना
कहता हैं मुझे भूल जाना,
अपनी यादों में ना बसाना
देना चाहूँ हर ख़ुशी उसे,
इसीलिए, मिटाना चाहूँ दिल से
वो साथ था जाना पहचाना
तरुण चौधरी