बचपन में किसी स्कूल में दाखिल नही हुए,
इसलिए जिन्दगी की दौड़ के काबिल नही हुए.
ख़ुशी खिलौना खेलने से नही मिलती है,
ख़ुशी स्कूल के दोस्तों के साथ खेलने से मिलती है.
बचपन में किसी स्कूल में दाखिल नही हुए,
इसलिए जिन्दगी की दौड़ के काबिल नही हुए.
ख़ुशी खिलौना खेलने से नही मिलती है,
ख़ुशी स्कूल के दोस्तों के साथ खेलने से मिलती है.
एक रात जब दरवाजे पर दस्तक हुई, तो लगा कोई आया होगा..
आख़िर देर रात ये है कौन। कहीं कोई बुरी खबर तो ना लाया होगा..?
बिस्तर से उठा घबराहट के साथ, रात ताला भी तो लगाया होगा..
चाबी ना जाने कहां रख दी मैंने, ऐसा होगा, रात दिमाग में ना आया होगा..
चाबी लेकर दौड़ा दरवाजे की ओर, दरवाजा तो खोलू, शायद कोई घबराया होगा..
दरवाज़ा खोला कोई नहीं था, ये कोई मज़ाक का वक़्त है, जो दरवाज़ा खटखटाया
होगा..
ना जाने कौन था ये, जो इतनी रात गऐ मेरे दर पे आया होगा..?
पूरी रात निकल गई सोचने में, ये मेरा वहम था, या सच में कोई आया होगा..
ਸੁੱਕ ਗਏ ਰੁੱਖਾਂ ਦੇ ਪੱਤੇ
ਟੁੱਟ ਗਏ ਨੇ ਖ਼ੁਆਬ ਜੀ
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤੂੰ ਰੁਹੋ ਮਾਰਿਆ
ਉਹ ਵੀ ਲੈਂਦੇ ਤੇਰੇ ਖ਼ੁਆਬ ਜੀ
ਇੱਕ ਤੇਰੀ ਮਹੁੱਬਤ ਕਰਕੇ
ਦਿਵਾਨੇ ਸੂਲ਼ੀ ਉੱਤੇ ਚੜ੍ਹ ਗਏ
ਦੋਲਤ ਵਾਹ ਕੀ ਨਾਂ ਤੇਰਾ
ਤੇਰੇ ਲਈ ਤਾਂ ਆਪਣੇ ਆਪਣੀਆਂ ਤੋਂ ਲੱੜ ਮਰ ਗਏ
ਇੱਕ ਤੈਨੂੰ ਹੀ ਪਾਉਣ ਦੀ ਭੁੱਖ
ਮਿਟਦੀ ਨਾ ਤੈਨੂੰ ਪਾਕੇ ਬਈ
ਮੈਂ ਵੇਖ ਲਿਆ ਕਮਾਲ ਤੇਰਾ
ਅੱਜ ਕੱਲ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਅਜ਼ਮਾ ਕੇ ਬਈ