बचपन में किसी स्कूल में दाखिल नही हुए,
इसलिए जिन्दगी की दौड़ के काबिल नही हुए.
ख़ुशी खिलौना खेलने से नही मिलती है,
ख़ुशी स्कूल के दोस्तों के साथ खेलने से मिलती है.
Enjoy Every Movement of life!
बचपन में किसी स्कूल में दाखिल नही हुए,
इसलिए जिन्दगी की दौड़ के काबिल नही हुए.
ख़ुशी खिलौना खेलने से नही मिलती है,
ख़ुशी स्कूल के दोस्तों के साथ खेलने से मिलती है.
“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
me sochda da jihnu asal zindagi,
sameh ton pata chaleyaa
oh taan ik kalpana c
ਮੈਂ ਸੋਚਦਾ ਸਾਂ ਜਿਹਨੂੰ ਅਸਲ ਜ਼ਿੰਦਗੀ
ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਪਤਾ ਚੱਲਿਆ
ਓਹ ਤਾਂ ਇਕ ਕਲਪਣਾ ਸੀ
#Awaaz