main ho jana chahti hu unse itni dur,
magar hu mai behad majboor
ki mujhme samaye hai vo aise
jaise chandani mein noor
main ho jana chahti hu unse itni dur,
magar hu mai behad majboor
ki mujhme samaye hai vo aise
jaise chandani mein noor
बिछड़ के मुझसे, इन गलियों में कितनी दूर जाओगे...
परवानों की बस्ती है, जहां जाओगे मुझे हर जगह पाओगे...
गुज़रा पल, मीठी बातें और वो हसीन शामें सब बुलाते हैं तुम्हे...
इक झूठ ही सही बस कहदो के तुम कल आओगे,
इंतज़ार करना पसंद नहीं पर, मेरी नज़रें राहों पर टिकी हैं...
पता है मुझे रास्ता बदल गया तुम्हारा लेकिन, दिलासा दिए बैठा हूं के तुम कल आओगे...
