“Ek Badnaam Ashiq”
Jikr bhi tera
fikr bhi teri
ishq bhi tera
Mohabbat bhi teri
Mai to kayal hun is khubsurat se dil ka
Vrna ye adaa bhi teri
Orr sb wafaa bhi teri
“Ek Badnaam Ashiq”
Jikr bhi tera
fikr bhi teri
ishq bhi tera
Mohabbat bhi teri
Mai to kayal hun is khubsurat se dil ka
Vrna ye adaa bhi teri
Orr sb wafaa bhi teri
राजनीति की दुनिया में खेल बहुत है,
कोई जीता है, कोई हारा है।
सत्ता की भूख और वाद-विवाद,
मन में जलती चिंगारी है।
राजनेताओं की रंगीन छलावा,
जनता को वहमों में बँधाता है।
कुछ वादे खाली और कुछ झूले धूले,
आम आदमी को खोखला बनाता है।
वाद-विवाद के आगे सच्चाई छिपती,
लोकतंत्र की मूल्यों पर भारी है।
शोर और तामझाम में खो गई है,
सम्मान, सद्भाव और आदर्शि है।
नीतिबद्धता और समर्पण की कमी,
राजनीति को कर रही है मिट्टी।
सच्ची सेवा की बजाए प्रतिष्ठा,
हौसले को तोड़ रही है मिट्टी।
चाहे जितना बदले युगों का सफ़र,
राजनीति का रंग हर बार वही।
प्रशासनिक शक्ति की लालसा में,
जनता भूल जाती है खुद को वही।
pattharon se pyaar kiya naadaan the ham,
galatee huee kyoki insaan the ham,
aaj jinhen nazaren milaane mein takaleeph hotee hain,
kabhee usee shakhs kee jaan the ham…
पत्थरों से प्यार किया नादान थे हम,
गलती हुई क्योकि इंशान थे हम,
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती हैं,
कभी उसी शख्स की जान थे हम…