“Ek Badnaam Ashiq”
Jikr bhi tera
fikr bhi teri
ishq bhi tera
Mohabbat bhi teri
Mai to kayal hun is khubsurat se dil ka
Vrna ye adaa bhi teri
Orr sb wafaa bhi teri
“Ek Badnaam Ashiq”
Jikr bhi tera
fikr bhi teri
ishq bhi tera
Mohabbat bhi teri
Mai to kayal hun is khubsurat se dil ka
Vrna ye adaa bhi teri
Orr sb wafaa bhi teri
Kive byan kra pyar mera tere layi sajjna ve
Bas jaan le enna ke har jagah tu tu te Bs tu e..!!
ਕਿਵੇਂ ਬਿਆਨ ਕਰਾਂ ਪਿਆਰ ਮੇਰਾ ਤੇਰੇ ਲਈ ਸੱਜਣਾ ਵੇ
ਬਸ ਜਾਣ ਲੈ ਇੰਨਾ ਕਿ ਹਰ ਜਗ੍ਹਾ ਤੂੰ ਤੂੰ ਤੇ ਬਸ ਤੂੰ ਏ..!!
हमने डूबते सूरज की एक शाम को अपना किरदार बदल डाला,
के उस मोहब्बत की चुभन को शायरी का नजमा दे डाला,
लोग मेरी तकरीरों पर वाह वाही दे रहे थे,
भीड़ में कुछ लोग ताली बजाकर, तो कुछ लोग अपनी नाकाम मोहब्बत की दलील दे रहे थे।
महफिल के शोर से एक जानी पहचानी सी आवाज आई,
तू आज भी आगे नहीं बढ़ा की उसने गुहार लगाई,
उसकी इस शिकायत में परवान था पुराने यारो का ।
मै हैरान था कौन था यह शक्स
अनजानों की भीड़ में जिसने मेरे शब्दो में छुपी नाकाम मोहब्बत को पहचाना था,
मुस्कुराता हुआ सामने आया तब समझ आया अरे यह तो यार पुराना था।