“Ek Badnaam Ashiq”
Jikr bhi tera
fikr bhi teri
ishq bhi tera
Mohabbat bhi teri
Mai to kayal hun is khubsurat se dil ka
Vrna ye adaa bhi teri
Orr sb wafaa bhi teri
“Ek Badnaam Ashiq”
Jikr bhi tera
fikr bhi teri
ishq bhi tera
Mohabbat bhi teri
Mai to kayal hun is khubsurat se dil ka
Vrna ye adaa bhi teri
Orr sb wafaa bhi teri
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
तुम्हारे गुजरे पलों में बेशक मैं नहीं थी
तुम्हारे संग भविष्य की अपेक्षा भी नहीं थी
हां,वर्तमान के कुछ चंद क्षण
साझा करने की ख्वाहिश जरुर थी।
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
देखो, आज फिर उंगलियों ने मेरी
कलम उठाई है
कुछ अनसुनी भावनाओं को संग अपने
समेट लाई है
माना ,मेरे शब्दों ने आहत किया तुम्हें
लेकिन क्या,असल भाव को पहचाना तुमने?
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
उलझ गए तुम निरर्थक शब्दों में
पढ़ा नहीं जो लिखा है कोमल हृदय में
चल दिए छोड़ उसे, तुम अपनी अना में
बंधे थे हम तुम, जिस अनदेखे रिश्ते की डोर में
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
बीत गए कई बारिश के मौसम
क्या धुले नहीं, जमे धूल मन के?
है अर्जी मेरी चले आओ तुम
मेरे भीतर के तम को रोशनी दिखाओ तुम..
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
puchhda ee kahani meri
kade apni taa sunaa
ehni karda e fikar meri
supna jeha lagda ee
eh asal zindagi vich taa nahi ho sakda
ਪੁੱਛਦਾ ਐਂ ਕਹਾਣੀ ਮੇਰੀ
ਕਦੇ ਆਪਣੀ ਤਾਂ ਸੁਣਾਂ
ਏਹਣੀ ਕਰਦਾ ਐਂ ਫ਼ਿਕਰ ਮੇਰੀ
ਸੁਪਨਾਂ ਜਿਹਾਂ ਲਗਦਾ ਐ
ਐਹ ਅਸਲ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦਾ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷