“EK DIN TU BHI CHALA JAYEGA,
PHIR SE MERE DIL KO RULAYEGA,
YE SAB KAR KE NA JAANE KYA PAYEGA,
PHIR EK RAAT YE DIL AKELA BITAYEGA”
“EK DIN TU BHI CHALA JAYEGA,
PHIR SE MERE DIL KO RULAYEGA,
YE SAB KAR KE NA JAANE KYA PAYEGA,
PHIR EK RAAT YE DIL AKELA BITAYEGA”
“थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…
मैंने चलना ही छोड़ दिया है।
फासलें अक्सर रिश्तों में…
अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने..
अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है।
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ…
खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने…
अपनापन ही छोड़ दिया है।
याद तो करता हूँ मैं सभी को… और परवाह भी करता हूँ सब की, पर कितनी करता हूँ… बस, बताना छोड़ दिया है।।”
Things which exists for “REASON”
end with the end of “the REASON”