हकीक़त बता रहा हु, ये सपना समझ रहे हैं
और हर एक आशिक़ का दर्द, एक जैसा है
मैं अपना सुना रहा हूं,ये अपना समझ रहें है
हकीक़त बता रहा हु, ये सपना समझ रहे हैं
और हर एक आशिक़ का दर्द, एक जैसा है
मैं अपना सुना रहा हूं,ये अपना समझ रहें है
मृगजळाच्या जगात या कृष्ण सारथी तु
निर्जण वाळवटांतला पाण्याचा थेंब तु
मावळता सूर्य हा चंद्र प्रकाश तु
सोडून गेले जग मजला तरी सोबती तु
भटकल्या जीवनाचा विसावा तु
माझ्या प्रत्येक प्रश्नाचे उत्तर तू
या सुदामाचा कृष्णा तु
सोडून गेले जग मजला तरी सोबती तू
या तळपत्या उन्हातील सावली तु
पडता गारवा जिवनाची ऊब तु
जगण्यास या जगात माझा श्वास तु
सोडून गेले जग मजला तरी सोबती तु….
शब्द ~ पवन पाटील…
