हकीक़त बता रहा हु, ये सपना समझ रहे हैं
और हर एक आशिक़ का दर्द, एक जैसा है
मैं अपना सुना रहा हूं,ये अपना समझ रहें है
Enjoy Every Movement of life!
हकीक़त बता रहा हु, ये सपना समझ रहे हैं
और हर एक आशिक़ का दर्द, एक जैसा है
मैं अपना सुना रहा हूं,ये अपना समझ रहें है
ज़िन्दगी सीधे साधे चलना ठीक नही
उबड़ खाबड़ पड़ाव भी जरूरी है,
तैरते तैरते बाजू थक जाएंगे
एक पल के लिए नाव भी जरूरी है,
बदलाव भी जरूरी
ये घाव भी जरूरी है,
इतनी धूप अच्छी नेही
थोड़ी छांव भी जरूरी है..!
हद-ए-शहर से निकली तो,
गांव-गांव चली..
कुछ यादें मेरे संग,
पांव-पांव चली..!
सफर जो धूप का किया तो,
तजुर्बा हुआ..
वो ज़िन्दगी ही क्या जो,
छांव-छांव चली..!!
