Menu enna vi na todi sajjna
Ke khud nu mazboot karde karde mein pathar ban jawa..!!
ਮੈਨੂੰ ਇੰਨਾ ਵੀ ਨਾ ਤੋੜੀ ਸੱਜਣਾ
ਕਿ ਖੁਦ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਦੇ ਕਰਦੇ ਮੈਂ ਪੱਥਰ ਬਣ ਜਾਵਾਂ..!!
Menu enna vi na todi sajjna
Ke khud nu mazboot karde karde mein pathar ban jawa..!!
ਮੈਨੂੰ ਇੰਨਾ ਵੀ ਨਾ ਤੋੜੀ ਸੱਜਣਾ
ਕਿ ਖੁਦ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਦੇ ਕਰਦੇ ਮੈਂ ਪੱਥਰ ਬਣ ਜਾਵਾਂ..!!
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी
कुछ ख़ास फर्क नहीं होता तेरे ना होने से,
बस ये जिंदगी, जिंदगी जीना छोड़ देती है...
मोड़ देती है रास्ते मेरे तेरी गलियों में वहां,
जहां नजरें उठाने से धड़कने दम तोड देती हैं...
मिलने का दावा करती हैं,
बोल देती है तेरी तस्वीरें, तेरी ज़ुबां ना ही सही,
मुझे वहां वापस तेरी गलियों में छोड़ देती है...
वहीं जहां धड़कनें दम तोड देती हैं...