किसी को रफ्ता-रफ्ता चाहा था , अब किश्तों में मरते हैं ।
कैसे कहें अपना हाल-ए-दिल , क्या बताएँ कि हम मोहब्बत करते हैं ।।
ईश्क की सौदेबाजी में , नीलाम हो गई चाहते मेरी ।
नफा-नुकसान के फासलों में , उम्मीद की गुंजाइश ढूँढा करते हैं ।।
ख्वाबों के शहर में , चाहत का एक ख्याल आया ।
कई जवाबों के बाद , संगीन एक सवाल आया ।।
रूखसत किया जिसे , जिसकी पसंद से हमने ।
वो जो शख्स था , मेरी कई इबादतों के बाद आया ।।❤️🍂
Mein akhan band kar takkna chaheya
Roshni hoyi taan dikheya Nanak..!!
Mein suas suas ohnu yaad kra
Mere sahaan utte likheya nanak..!!
ਮੈਂ ਅੱਖਾਂ ਬੰਦ ਕਰ ਤੱਕਣਾ ਚਾਹਿਆ
ਰੌਸ਼ਨੀ ਹੋਈ ਤਾਂ ਦਿਖਿਆ ਨਾਨਕ..!!
ਮੈਂ ਸੁਆਸ ਸੁਆਸ ਉਹਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਾਂ
ਮੇਰੇ ਸਾਹਾਂ ਉੱਤੇ ਲਿਖਿਆ ਨਾਨਕ..!!