फिजाओं के बदलने का इंतज़ार मत कर
आँधियों के रुकने का इंतज़ार मत कर
पकड़ किसी को और फरार हो जा
पापा की पसंद का इंतज़ार मत कर
फिजाओं के बदलने का इंतज़ार मत कर
आँधियों के रुकने का इंतज़ार मत कर
पकड़ किसी को और फरार हो जा
पापा की पसंद का इंतज़ार मत कर
Samaj ko dikhane or Khelne k liye layi hui gudiya hi the hum!
Par, Afsoos.
bananewale ne is gudiya k sine mai dil dalkar bhej diya!!
करवट बदलकर सोने की कोशिश की, नींद फिर भी ना आई..
रात कमरे में बस हम दोनो थे, मैं और मेरी तनहाई..
उसे पसंद नहीं मुझसे दूर जाना, और मैने कभी वो पास ना बुलाई..
आखिर में बैठकर बातें की उससे, और जान पहचान बढ़ाई..
उसने कहा साथ उसे अच्छा लगता है मेरा, पर मुझे वो रास न आई..
समझाया उसे दूर होजा मुझसे, इतनी सी बात भी उसे समझ ना आई..
आखिर में अपनाना पड़ा उसे, वो तो मुझे छोड़ ना पाई..
जब अपनाकर उसे, आंखें बंद की मैने, तब जाकर कहीं मुझे नींद आई….