Kade tu keha c
g bhar k vekh liya kar mainu
hun tan akh bhar jandi aa
par tu nazar na aundi
ਕਦੇ ਤੂੰ ਕਿਹਾ ਸੀ
ਜੀ ਭਰ ਕੇ ਵੇਖ ਲਿਆ ਕਰ ਮੈਨੂੰ
ਹੁਣ ਤਾਂ ਅੱਖ ਭਰ ਜਾਂਦੀ ਆ
ਪਰ ਤੂੰ ਨਜ਼ਰ ਨਾ ਆਉਂਦੀ
Kade tu keha c
g bhar k vekh liya kar mainu
hun tan akh bhar jandi aa
par tu nazar na aundi
ਕਦੇ ਤੂੰ ਕਿਹਾ ਸੀ
ਜੀ ਭਰ ਕੇ ਵੇਖ ਲਿਆ ਕਰ ਮੈਨੂੰ
ਹੁਣ ਤਾਂ ਅੱਖ ਭਰ ਜਾਂਦੀ ਆ
ਪਰ ਤੂੰ ਨਜ਼ਰ ਨਾ ਆਉਂਦੀ
ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਚਲਦਿਆ ਮੰਜਿਲ ਭਾਵੇਂ ਨਾ ਮਿਲੇ, ਪਰ ਵਾਅਦਾ ਰਿਹਾ ਸਫਰ ਯਾਦਗਾਰ ਰਹੂਗਾ |❤️
Tere naal chldiyan manjil bhave na mile, par Wada rhiya safar yaadgaar rhuga |❤️
महर-ओ- वफ़ा की शमआ जलाते तो बात थी
इंसानियत का पास निभाते तो बात थी
जम्हूरियत की शान बढ़ाते तो बात थी
फ़िरक़ा परस्तियों को मिटाते तो बात थी
जिससे कि दूर होतीं कुदूरत की ज़ुल्मतें
ऐसा कोई चराग़ जलाते तो बात थी
जम्हूरियत का जश्न मुबारक तो है मगर
जम्हूरियत की जान बचाते तो बात थी
ज़रदार से यह हाथ मिलाना बजा मगर
नादार को गले से लगाते तो बात थी
बर्बाद होने का तो कोई ग़म नहीं मगर
अपना बनाके मुझको मिटाते तो बात थी
हिंदुस्तान की क़सम ऐ रेख़्ता हूँ ख़ुश
पर मुंसिफ़ी की बात बताते तो बात थी