Kade tu keha c
g bhar k vekh liya kar mainu
hun tan akh bhar jandi aa
par tu nazar na aundi
ਕਦੇ ਤੂੰ ਕਿਹਾ ਸੀ
ਜੀ ਭਰ ਕੇ ਵੇਖ ਲਿਆ ਕਰ ਮੈਨੂੰ
ਹੁਣ ਤਾਂ ਅੱਖ ਭਰ ਜਾਂਦੀ ਆ
ਪਰ ਤੂੰ ਨਜ਼ਰ ਨਾ ਆਉਂਦੀ
Kade tu keha c
g bhar k vekh liya kar mainu
hun tan akh bhar jandi aa
par tu nazar na aundi
ਕਦੇ ਤੂੰ ਕਿਹਾ ਸੀ
ਜੀ ਭਰ ਕੇ ਵੇਖ ਲਿਆ ਕਰ ਮੈਨੂੰ
ਹੁਣ ਤਾਂ ਅੱਖ ਭਰ ਜਾਂਦੀ ਆ
ਪਰ ਤੂੰ ਨਜ਼ਰ ਨਾ ਆਉਂਦੀ
ज़िन्दगी के लिए इक ख़ास सलीक़ा रखना
अपनी उम्मीद को हर हाल में ज़िन्दा रखना
उसने हर बार अँधेरे में जलाया ख़ुद को
उसकी आदत थी सरे-राह उजाला रखना
आप क्या समझेंगे परवाज़ किसे कहते हैं।
आपका शौक़ है पिंजरे में परिंदा रखना
बंद कमरे में बदल जाओगे इक दिन लोगो
मेरी मानो तो खुला कोई दरीचा रखना
क्या पता राख़ में ज़िन्दा हो कोई चिंगारी
जल्दबाज़ी में कभी पॉव न अपना रखना
वक्त अच्छा हो तो बन जाते हैं साथी लेकिन वक़्त मुश्किल हो तो बस ख़ुद पे भरोसा रखना
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा
न कोई चिराग अब जलाऊंगा,न कोई अंधेरा मिटाऊंगा
जो रह गई याद तो उसे नदियों में बहाऊंगा
जो मिल गए राहों में तो रस्ता बदल जाऊंगा
बांधा था जिस रिश्ते से वो रिश्ता तोड़ जाऊंगा
नीर भरे नयनों में एक तड़प छोड़ जाऊंगा
कीचड़ ही सही एक दिन कमल बन खिल जाऊंगा
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा