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punjabi shayari

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Title: punjabi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Tere ishq ch jhalle jehe hoye rehna e || true love || Punjabi poetry

zidd eho te dil mera || Punjabi love shayari

Aale rakhle samb dil sada hun
Meri sune na ho gya e taada hun
Din guzrde kive hun pta nahi lagda
Palla tera jado da esne fadeya e
Hun dekhiye kise hor vll eh vss ch nhi
Tera shonk jeha eda hun chdeya e
Tere ishq ch jhalle jhe hoye rehna e
Zidd eho te dil mera arheya e

Mar thode te gya e dil duniya nu bhul k
Rog anokha jeha lag gya e tere te dull k
Haar paya e gal vich esa chandra
Tere naam de motiyan naal jo jrheya e
Hun hatda nahi piche lakh koshish te v
Tera shonk jeha esnu haye chdeya e
Tere ishq ch jhalle jhe hoye rehna e
Zidd eho te dil mera arheya e

Fullan vang mehkde ne din mere
Sajjna sambe nahi jande metho chaa tere
Har pal tera cheta aayi janda e
Kesa naag eh pyar da larheya e
Nind chain sab kuj uddeya e
Tera shonk hi bas hun chdeya e
Tere ishq ch jhalle jhe hoye rehna e
Zidd eho te dil mera arheya e

ਆ ਲੈ ਰੱਖ ਲੈ ਸਾਂਭ ਦਿਲ ਸਾਡਾ ਹੁਣ
ਮੇਰੀ ਸੁਣੇ ਨਾ ਹੋ ਗਿਆ ਏ ਤੁਹਾਡਾ ਹੁਣ
ਦਿਨ ਗੁਜ਼ਰਦੇ ਕਿਵੇਂ ਹੁਣ ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਲਗਦਾ
ਪੱਲਾ ਤੇਰਾ ਜਦੋਂ ਦਾ ਇਸਨੇ ਫੜਿਆ ਏ
ਹੁਣ ਦੇਖੀਏ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਵੱਲ ਇਹ ਵੱਸ ਚ ਨਹੀਂ
ਤੇਰਾ ਸ਼ੌਂਕ ਜਿਹਾ ਏਦਾਂ ਹੁਣ ਚੜ੍ਹਿਆ ਏ
ਤੇਰੇ ਇਸ਼ਕ ‘ਚ ਝੱਲੇ ਜਿਹੇ ਹੋਏ ਰਹਿਣਾ ਏ
ਜ਼ਿੱਦ ਇਹੋ ਤੇ ਦਿਲ ਮੇਰਾ ਅੜਿਆ ਏ..!!

ਮਰ ਥੋਡੇ ਤੇ ਗਿਆ ਦਿਲ ਦੁਨੀਆਂ ਨੂੰ ਭੁੱਲ ਕੇ
ਰੋਗ ਅਨੋਖਾ ਜੇਹਾ ਲਗ ਗਿਆ ਤੇਰੇ ਉੱਤੇ ਡੁੱਲ ਕੇ
ਹਾਰ ਪਾਇਆ ਏ ਗਲ ਵਿੱਚ ਐਸਾ ਚੰਦਰਾ
ਤੇਰੇ ਨਾਮ ਦੇ ਮੋਤੀਆਂ ਨਾਲ ਜੋ ਜੜਿਆ ਏ
ਹੁਣ ਹੱਟਦਾ ਨਹੀਂ ਪਿੱਛੇ ਲੱਖ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਤੇ ਵੀ
ਤੇਰਾ ਸ਼ੌਂਕ ਜੇਹਾ ਇਸਨੂੰ ਹਾਏ ਚੜ੍ਹਿਆ ਏ
ਤੇਰੇ ਇਸ਼ਕ ‘ਚ ਹੀ ਝੱਲੇ ਜਿਹੇ ਹੋਏ ਰਹਿਣਾ ਏ
ਜ਼ਿੱਦ ਇਹੋ ‘ਤੇ ਦਿਲ ਮੇਰਾ ਅੜਿਆ ਏ..!!

ਫੁੱਲਾਂ ਵਾਂਗ ਮਹਿਕਦੇ ਨੇ ਦਿਨ ਹੁਣ ਮੇਰੇ
ਸੱਜਣਾ ਸਾਂਭੇ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦੇ ਮੈਥੋਂ ਚਾਅ ਤੇਰੇ
ਹਰ ਪਲ ਤੇਰਾ ਚੇਤਾ ਆਈ ਜਾਂਦਾ ਏ
ਕੈਸਾ ਨਾਗ ਇਹ ਪਿਆਰ ਦਾ ਲੜ੍ਹਿਆ ਏ
ਨੀਂਦ ਚੈਨ ਸਭ ਕੁੱਝ ਉੱਡਿਆ ਏ
ਤੇਰਾ ਸ਼ੌਂਕ ਹੀ ਬਸ ਹੁਣ ਚੜ੍ਹਿਆ ਏ
ਤੇਰੇ ਇਸ਼ਕ ‘ਚ ਝੱਲੇ ਜਿਹੇ ਹੋਏ ਰਹਿਣਾ ਏ
ਜ਼ਿੱਦ ਇਹੋ ਤੇ ਦਿਲ ਮੇਰਾ ਅੜਿਆ ਏ..!!

Title: Tere ishq ch jhalle jehe hoye rehna e || true love || Punjabi poetry


ईश्वर अच्छा ही करता है : अकबर-बीरबल की कहानी

बीरबल एक ईमानदार तथा धर्म-प्रिय व्यक्ति था। वह प्रतिदिन ईश्वर की आराधना बिना-नागा किया करता था। इससे उसे नैतिक व मानसिक बल प्राप्त होता था। वह अक्सर कहा करता था कि “ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है, कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि ईश्वर हम पर कृपादृष्टि नहीं रखता, लेकिन ऐसा होता नहीं। कभी-कभी तो उसके वरदान को भी लोग शाप समझने की भूल कर बैठते हैं। वह हमको थोड़ी पीड़ा इसलिए देता है ताकि बड़ी पीड़ा से बच सकें।”

एक दरबारी को बीरबल की ऐसी बातें पसंद न आती थीं। एक दिन वही दरबारी दरबार में बीरबल को संबोधित करता हुआ बोला, ‘‘देखो, ईश्वर ने मेरे साथ क्या किया। कल शाम को जब मैं जानवरों के लिए चारा काट रहा था तो अचानक मेरी छोटी उंगली कट गई। क्या अब भी तुम यही कहोगे कि ईश्वर ने मेरे लिए यह अच्छा किया है ?’’

कुछ देर चुप रहने के बाद बोला बीरबल, ‘‘मेरा अब भी यही विश्वास है क्योंकि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है।’’

सुनकर वह दरबारी नाराज हो गया कि मेरी तो उंगली कट गई और बीरबल को इसमें भी अच्छाई नजर आ रही है। मेरी पीड़ा तो जैसे कुछ भी नहीं। कुछ अन्य दरबारियों ने भी उसके सुर में सुर मिलाया।

तभी बीच में हस्तक्षेप करते हुए बादशाह अकबर बोले, ‘‘बीरबल हम भी अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, लेकिन यहां तुम्हारी बात से सहमत नहीं। इस दरबारी के मामले में ऐसी कोई बात नहीं दिखाई देती जिसके लिए उसकी तारीफ की जाए।’’

बीरबल मुस्कराता हुआ बोला, ’’ठीक है जहांपनाह, समय ही बताएगा अब।’’

तीन महीने बीत चुके थे। वह दरबारी, जिसकी उंगली कट गई थी, घने जंगल में शिकार खेलने निकला हुआ था। एक हिरन का पीछा करते वह भटककर आदिवासियों के हाथों में जा पड़ा। वे आदिवासी अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि में विश्वास रखते थे। अतः वे उस दरबारी को पकड़कर मंदिर में ले गए, बलि चढ़ाने के लिए। लेकिन जब पुजारी ने उसके शरीर का निरीक्षण किया तो हाथ की एक उंगली कम पाई।

‘‘नहीं, इस आदमी की बलि नहीं दी जा सकती।’’ मंदिर का पुजारी बोला, ‘‘यदि नौ उंगलियों वाले इस आदमी को बलि चढ़ा दिया गया तो हमारे देवता बजाय प्रसन्न होने के क्रोधित हो जाएंगे, अधूरी बलि उन्हें पसंद नहीं। हमें महामारियों, बाढ़ या सूखे का प्रकोप झेलना पड़ सकता है। इसलिए इसे छोड़ देना ही ठीक होगा।’’

और उस दरबारी को मुक्त कर दिया गया।

अगले दिन वह दरबारी दरबार में बीरबल के पास आकर रोने लगा।

तभी बादशाह भी दरबार में आ पहुंचे और उस दरबारी को बीरबल के सामने रोता देखकर हैरान रह गए।

‘‘तुम्हें क्या हुआ, रो क्यों रहे हो ?’’ अकबर ने सवाल किया।

जवाब में उस दरबारी ने अपनी आपबीती विस्तार से कह सुनाई। वह बोला, ‘‘अब मुझे विश्वास हो गया है कि ईश्वर जो कुछ भी करता है, मनुष्य के भले के लिए ही करता है। यदि मेरी उंगली न कटी होती तो निश्चित ही आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसीलिए मैं रो रहा हूं, लेकिन ये आंसू खुशी के हैं। मैं खुश हूं क्योंकि मैं जिन्दा हूं। बीरबल के ईश्वर पर विश्वास को संदेह की दृष्टि से देखना मेरी भूल थी।’’

अकबर ने मंद-मंद मुस्कराते हुए दरबारियों की ओर देखा, जो सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे। अकबर को गर्व महसूस हो रहा था कि बीरबल जैसा बुद्धिमान उसके दरबारियों में से एक है।

Title: ईश्वर अच्छा ही करता है : अकबर-बीरबल की कहानी