Bahut kujh kehna si tainu
par je tu haal hi nahi samajh sakeyaa
galaa ki samjhegaa
ਬਹੁਤ ਕੁਝ ਕਹਿਣਾ ਸੀ ਤੈਨੂੰ
ਪਰ ਜੇ ਤੂੰ ਹਾਲ ਹੀ ਨਹੀ ਸਮਝ ਸਕਿਆ
ਗੱਲਾਂ ਕੀ ਸਮਝੇਗਾ
Bahut kujh kehna si tainu
par je tu haal hi nahi samajh sakeyaa
galaa ki samjhegaa
ਬਹੁਤ ਕੁਝ ਕਹਿਣਾ ਸੀ ਤੈਨੂੰ
ਪਰ ਜੇ ਤੂੰ ਹਾਲ ਹੀ ਨਹੀ ਸਮਝ ਸਕਿਆ
ਗੱਲਾਂ ਕੀ ਸਮਝੇਗਾ
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी
तेरे मासूम चेहरे से हमने, काफ़ी धोखे खाए हैं..
धोखे खाकर भी तुझसे हम, इश्क फरमाने आए हैं..
तू बेवफा है फिर भी तेरे लिए, वफ़ा का तोहफा लाए हैं..
तेरी अकड़ कुबूलेगी नहीं, ये सोच के हम घबराऐ हैं..
फिर भी अपना नाजुक दिल, तोहफे में हम रख लाए हैं….