मरहम घाव ढूंढ रहे हैं, पत्ते छांव ढूंढ रहे हैं,
मंजिलें थोड़ी दूर हैं, रास्ते पांव ढूंढ रहे हैं...
गुमराह करने वालों की भीड़ बहुत बड़ी है
वहां मत जाना वो चलने को बस दाव ढूंढ रहे हैं...
बेच देंगे वो सरकारें भी इक दिन
मिलने का सही भाव ढूंढ रहे हैं...
बेगुनाहों को बेजान करना आदत है इनकी
बस, मूंछों को देने के लिए झूठा ताव ढूंढ रहे
हैं...
Oh chale gaye beparwah ho ke
Asi ikalle kehre injh reh gaye..!!
Oh aap ta sade hoye Na
Te sathon sanu vi kho k le gaye..!!
ਉਹ ਚਲੇ ਗਏ ਬੇਪਰਵਾਹ ਹੋ ਕੇ
ਅਸੀਂ ਇਕੱਲੇ ਕਹਿਰੇ ਇੰਝ ਰਹਿ ਗਏ..!!
ਉਹ ਆਪ ਤੇ ਸਾਡੇ ਹੋਏ ਨਾ
ਤੇ ਸਾਥੋਂ ਸਾਨੂੰ ਵੀ ਖੋਹ ਕੇ ਲੈ ਗਏ..!!