
Gummiyaan soortaan nu kaun modh ghalle
chit mera kone vich baitha vichaarda e
ehne hun zindri ton ki laina
eh taan maut nu pukaarda e

Gummiyaan soortaan nu kaun modh ghalle
chit mera kone vich baitha vichaarda e
ehne hun zindri ton ki laina
eh taan maut nu pukaarda e
Jo ohde gam ch jaag bitayian ne
Kon samjhe peerh ohna raatan di..!!
Ohde naal mohobbat kinni c
Ohne kadar hi na payi jazbatan di..!!
ਜੋ ਓਹਦੇ ਗ਼ਮ ‘ਚ ਜਾਗ ਬਿਤਾਈਆਂ ਨੇ
ਕੌਣ ਸਮਝੇ ਪੀੜ ਉਹਨਾਂ ਰਾਤਾਂ ਦੀ..!!
ਓਹਦੇ ਨਾਲ ਮੋਹੁੱਬਤ ਕਿੰਨੀ ਸੀ
ਓਹਨੇ ਕਦਰ ਹੀ ਨਾ ਪਾਈ ਜਜ਼ਬਾਤਾਂ ਦੀ..!!
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा