
Gummiyaan soortaan nu kaun modh ghalle
chit mera kone vich baitha vichaarda e
ehne hun zindri ton ki laina
eh taan maut nu pukaarda e

Gummiyaan soortaan nu kaun modh ghalle
chit mera kone vich baitha vichaarda e
ehne hun zindri ton ki laina
eh taan maut nu pukaarda e
Chahatein badhne lgi hain tumse milne ke baad,
Din kab gujra ye bhi nhi tha mujhko yaad,
Phir waqt ke namanzuri ne nhi smjhe mere jazbaat,
Kya pta tha vo shaam mein hui thi humari aakhrimulaqat…….
चाहतें बढ़ने लगी हैं तुमसे मिलने के बाद
दिन कब गुज़रा ये भी नही था मुझको याद,
फिर वक़्त के नामंजूरी ने नहीं समझे मेरे जज़्बात,
क्या पता था वो शाम में हुई थी हमारी आखरी मुलाकात…
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी