Gurbani || waheguru thoughts was last modified: April 11th, 2023 by Harshita Mehta (harsh)
Enjoy Every Movement of life!
मरहम घाव ढूंढ रहे हैं, पत्ते छांव ढूंढ रहे हैं,
मंजिलें थोड़ी दूर हैं, रास्ते पांव ढूंढ रहे हैं...
गुमराह करने वालों की भीड़ बहुत बड़ी है
वहां मत जाना वो चलने को बस दाव ढूंढ रहे हैं...
बेच देंगे वो सरकारें भी इक दिन
मिलने का सही भाव ढूंढ रहे हैं...
बेगुनाहों को बेजान करना आदत है इनकी
बस, मूंछों को देने के लिए झूठा ताव ढूंढ रहे
हैं...
Umar zaya kardi auro ke vajood me kamiya nikalte nikalte itna khud ko trasha hota to khuda mil jata
उम्र जाया करदी औरों के वजूद में कमियां निकालते निकालते इतना खुद को तराशा होता तो खुदा मिल जाता
