“जो अपने गुस्से को अपनी ताकत बना सकते है, वो एक ना एक दिन जरूर सफल होते है।”
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“जो अपने गुस्से को अपनी ताकत बना सकते है, वो एक ना एक दिन जरूर सफल होते है।”
Woh khamosh kush is tarah kadar hai
jaise koi intkaam le reha hai
वो खामोश कुछ इस कदर है
जैसे कोई इंतकाम ले रहा हो।।
~रूचिता सिन्हा