
Pathar sutteya dil de samandar vich ohne
soch ke k shayed tar gya hona
pr ohnu ni pata e kinni dhungai te gya hona

Pathar sutteya dil de samandar vich ohne
soch ke k shayed tar gya hona
pr ohnu ni pata e kinni dhungai te gya hona
tainu mere to koi kho ni si sakda
je teri marzi na hundi
ਤੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਕੋਈ ਖੋਹ ਨੀ ਸੀ ਸਕਦਾ
ਜੇ ਤੇਰੀ ਮਰਜ਼ੀ ਨਾ ਹੁੰਦੀ
आग को बुझा देता है क्रोध ।
आग जलते है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।
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अपना कविता किसी को मत पढ़ाओ।
अगर कोई पढ़ना चाहते है, उसे सच ढूंढ़ने के लिए बताओ।
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जबाब हर बात पे मत दो।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।
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जब बन रहे हों, सुनना पड़ता हैं।
जब बन गये हों, लोग सुनने आते हैं।
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रिश्ते आसमान की रूप।
आज बारिश, कल धूप।
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बात लहर की तरह।
जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो ज़रा।
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मैदान में जितना राजनीती होता है, उससे भी ज्यादा होता है घर पर।
घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता हे घर पर।
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जो तुम्हे पाता है, वो किसी को मत बताओ।
समय में प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे के तुम मुर्ख हो।