Jaane na kyu yeh ki hai khataa
Tohrta dil mera hue tum bewafa
Baata do na tere bina jeena zara
Haara hai hara tumse dil krega na
Mohabbat fir kabhi dobara
Jaane na kyu yeh ki hai khataa
Tohrta dil mera hue tum bewafa
Baata do na tere bina jeena zara
Haara hai hara tumse dil krega na
Mohabbat fir kabhi dobara
अंकुर मिट्टी में सोया था सपने मै खोया था
नन्हा बीज हवा ने लाकर एक जगह बोया था।
तभी बीज ने ली अंगड़ाई देह जरा सी पाई
आंख खोलकर बाहर आया, दुनिया पड़ी दिखाई
खाद्य मिली पानी भी पाया ऐसे जीवन आया
ऊपर बड़ा इधर, धरती में नीचे उधर समाया।
तने डालिया पत्ते आए और फल मुस्कराए
नन्हा बीज वृक्ष बनकर धरती पर लहराए।
जीता मरता रोगी होता दुख आने पर सोता
वृक्ष सांस लेता बढ़ता है जगता है फिर सोता।
रोज शाम को चिड़िया आती सारी रात बिताती
बड़े सवेरे जाग वृक्ष, पर ची ची ची ची गाती।
छाया आती बड़ी सुआती सब टोली झूट जाती
तरह तरह के खेल वर्क्ष के नीचे बैठ रचती।
जो कहते हैं रंगत माईने नही रखती
उन्हें ही अपने हुसन पे इतराते देखा है🥀
नहीं रही अब कीमत यहाँ लहज़े की
सोच समझ को ख़ाक में जाते देखा है🥀
नहीं है हिम्मत अब नए रिश्ते बनाने की
कई शख्सों को साथ छोड़ जाते देखा है🥀
पैरों के छाले भी थक गए दे दे कर दर्द ‘शरद’
हिम्मत देख मेरी उन्हें भी मुस्कुराते देखा है🥀
अच्छी निगाह की बात करते हैं जो लोग
उनकी नियत को हुसन देख डगमगाते देखा है🥀
मेरा अपना होने का दावा करते हैं जो
उन्हें ही मेरी कामयाबी पर खार खाते देखा है🥀
ओ मेरे दिलबर मेरे दिलकश मेरे दिलजू
तेरे साथ गुज़रा रास्ता जन्नत को जाते देखा है🥀
जब देखा था तेरी आंखों मै मैंने
खुदको सांस लेना तक भूल जाते देखा है🥀
कहते हैं प्यार ताकत है सबसे बड़ी इस दुनिया की
दौलत पे कई सच्चे प्यारों को लड़खड़ाते देखा है🥀