Banda bande nu mile, par pyar naal mile…
Roti hak di mile, bhawein achar naal mile…
ਬੰਦਾ ਬੰਦੇ ਨੂੰ ਮਿਲੇ, ਪਰ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਮਿਲੇ…
ਰੋਟੀ ਹੱਕ ਦੀ ਮਿਲੇ, ਭਾਵੇ ਅਚਾਰ ਨਾਲ ਮਿਲੇ…
Banda bande nu mile, par pyar naal mile…
Roti hak di mile, bhawein achar naal mile…
ਬੰਦਾ ਬੰਦੇ ਨੂੰ ਮਿਲੇ, ਪਰ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਮਿਲੇ…
ਰੋਟੀ ਹੱਕ ਦੀ ਮਿਲੇ, ਭਾਵੇ ਅਚਾਰ ਨਾਲ ਮਿਲੇ…
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है