Ham samjhte the diwaali ko chaand nahi nikalta
unko dekha toh hamari galat-fehmi door ho gai
ਹਮ ਸਮਝਤੇ ਥੇ ਦਿਵਾਲੀ ਕੋ ਚਾਦ ਨਹੀਂ ਨਿਕਲਤਾ
ਉਨਕੋ ਦੇਖ਼ਾ ਤੋ ਹਮਾਰੀ ਗਲਤਫਹਿਮੀ ਦੂਰ ਹੋ ਗਈ
Ham samjhte the diwaali ko chaand nahi nikalta
unko dekha toh hamari galat-fehmi door ho gai
ਹਮ ਸਮਝਤੇ ਥੇ ਦਿਵਾਲੀ ਕੋ ਚਾਦ ਨਹੀਂ ਨਿਕਲਤਾ
ਉਨਕੋ ਦੇਖ਼ਾ ਤੋ ਹਮਾਰੀ ਗਲਤਫਹਿਮੀ ਦੂਰ ਹੋ ਗਈ
Menu keha c kise ne tu likh mere lyi
Menu samjh na aayi ki jwab te likha
Ohde hassde chehre di shaitani te likha
Jaa masoomiyat kinni de hisab te likha????
ਮੈਨੂੰ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿਸੇ ਨੇ ਤੂੰ ਲਿਖ ਮੇਰੇ ਲਈ
ਮੈਨੂੰ ਸਮਝ ਨਾ ਆਈ ਕੀ ਜਵਾਬ ਤੇ ਲਿਖਾਂ
ਉਹਦੇ ਹੱਸਦੇ ਚਿਹਰੇ ਦੀ ਸ਼ੈਤਾਨੀ ਤੇ ਲਿਖਾਂ
ਜਾਂ ਮਾਸੂਮੀਅਤ ਕਿੰਨੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਤੇ ਲਿਖਾਂ????
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…