
ishq de raah bade awale ne
ithe diwe hanjuaan de baale jande ne
te aag dil diyaan vaatiyaan te lai jaandi hai

ishq de raah bade awale ne
ithe diwe hanjuaan de baale jande ne
te aag dil diyaan vaatiyaan te lai jaandi hai
उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
इक बीमार वसीयत करने वाला है
रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं
बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है
चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं
धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की
सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं
साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है
घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं
आज शिकारी की झोली भर जाएगी
आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं
जिंदगी तुझे जीने की साझीश जारी है
हर लम्हे मे दर्द है और दर्द से अपनी यारी है
कुछ न देके भी भोत कुछ दिया है तूने
एसिलिए तू कही न कही हमको प्यारी है ।
नुकसान भरा नहीं पिछली बरबादी का
फिर एक दफा तुझे सवारने की तयारी है
जिंदगी तुझे ज़ीने की साझीश जारी है ।
हर दिन आके झँझोड़ जाती है तू
जैसे सदियों से तेरी हमपे उधारी है
तू साथ दे या न दे हमारा
लेकिन तुजे जीने की ज़िद्द दिल मे उतारी है
जिंदगी तुझे जीने की साझीश जारी है ।
वक्त का खामोशी से गुजारना ओर धडकनों का यूं शोर मचाना
एह जिंदगी तू ही बता ये कैसी बेकरारी है
लौट आए जो वो पुराने लोग
तो पुछू आखिरी कैसे उन्होने उन्होने जिंदगी गुजारी है
जिंदगी तुझे जीने की साझीश जारी है ।
उम्मीद है तू साथ चलेगी मेरे
खवाबों से भरी हाथ मे मेरे पिटारी है
पूरे हो या न हो ये किस्मत का खेल है
पर जिंदगी तुझे जीने की जंग जारी है ।
……….. अजय कुमार ।