शायरी हर दिल में,
उमंग भर देती है
जो कभी बे-रंग थे, उन दिलों में भी,
मोहब्बत के रंग भर देती है
Shayari Har Dil Mein,
Umang Bhar Deti Hai
Jo Kabhi Berang The, Un Dilon Mein Bhi,
Mohabbat Ke Rang Bhar Deti Hai.
Shayari Har Dil Mein,
Umang Bhar Deti Hai
Jo Kabhi Berang The, Un Dilon Mein Bhi,
Mohabbat Ke Rang Bhar Deti Hai.
Bhola jeha si munda, tu duniyaadaari sikhan laata ni
padhai padhui taa ghat hi kiti, par tu likhan laata ni
pyaa ni si kade kudhi de chakar ch, tu kaise chakaraa ch paata ni
naa khaanda-peenda, naa saunda, ki hoyeaa yaara nu puchhe mata ni
ਭੋਲਾ ਜਿਹਾ ਸੀ ਮੁੰਡਾ,ਤੂੰ ਦੁਨੀਆਂਦਾਰੀ ਸਿੱਖਣ ਲਾਤਾ ਨੀ🙃
ਪੜਾਈ ਪੜੁਈ ਤਾਂ ਘੱਟ ਹੀ ਕੀਤੀ,ਪਰ ਤੂੰ ਲਿਖਣ ਲਾਤਾ ਨੀ✍️
ਪਿਆ ਨਾ ਸੀ ਕਦੇ ਕੁੜੀ ਦੇ ਚੱਕਰ’ਚ,ਤੂੰ ਕੈਸੇ ਚੱਕਰਾਂ’ਚ ਪਾਤਾ ਨੀ
ਨਾ ਖਾਂਦਾ-ਪੀਂਦਾ,ਨਾ ਸੌਂਦਾ,ਕੀ ਹੋਇਆ ਯਾਰਾਂ ਨੂ ਪੁੱਛੇ ਮਾਤਾ ਨੀ
👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧
एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।
बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।
ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।
आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।
कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।