Me us sakhash nu dil ch wsaa baithi
Jinu rabb ne mere hathaan diyaa leekaan ch likhiyaa hi nai
ਮੈਂ ਉਸ ਸ਼ਖਸ ਨੂੰ ਦਿਲ ਚ ਵਸਾ ਬੈਠੀ ,
ਜਿਨੂੰ ਰੱਬ ਨੇ ਮੇਰੇ ਹੱਥਾ ਦੀਆ ਲੀਕਾਂ ਚ ਲਿਖਿਆ ਹੀ ਨਈਂ
Me us sakhash nu dil ch wsaa baithi
Jinu rabb ne mere hathaan diyaa leekaan ch likhiyaa hi nai
ਮੈਂ ਉਸ ਸ਼ਖਸ ਨੂੰ ਦਿਲ ਚ ਵਸਾ ਬੈਠੀ ,
ਜਿਨੂੰ ਰੱਬ ਨੇ ਮੇਰੇ ਹੱਥਾ ਦੀਆ ਲੀਕਾਂ ਚ ਲਿਖਿਆ ਹੀ ਨਈਂ
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I