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Hawawa warga || punjabi kavita

ਹਵਾਵਾਂ ਵਰਗਾ ਹੋ ਗਿਆ ਏ ਤੂੰ
ਮੇਹ੍ਸੂਸ ਤਾਂ ਹੁੰਦਾ ਐਂ ਪਰ ਦਿਸਦਾ ਨੀ
ਤੂੰ ਬਦਲਾਂ ਤੇ ਅਸੀਂ ਵੀ ਬਦਲ ਗਏ
ਹੁਣ ਸਾਡੀ ਅੱਖ ਤੋਂ ਵੀ ਹੰਝੂ ਰਿਸਦਾ ਨੀ
ਕਦਮਾਂ ਕਦਮਾਂ ਤੇ ਜਾਂਣ ਗਏ ਰਾਜ਼ ਅਸੀਂ ਵੀ ਕਈ ਸਾਰੇ
ਕੰਮ ਕਿਸੇ ਤੋਂ ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਹੋਵੇ ਕਦਰ ਓਹਦੋਂ ਤੱਕ ਬੱਸ ਰਹਿੰਦੀ ਐ
ਕੰਮ ਨਿਕਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਚ ਕੋਈ ਪੁਛਦਾ ਨੀਂ

ਮੁਰਝਾਇਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ਫੁੱਲ ਹੁਣ ਓਹ
ਮਹੋਬਤ ਦਾ ਜੋਂ ਕਦੇ ਸੁਕਦਾ ਨੀ
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਤਾ ਹੁੰਦਾ ਐਂ ਕੇ ਨਹੀਂ ਰਹੇ ਸਕਦੇ ਓਹ ਸਾਡੇ ਬਿਨ
ਐਹ ਜਾਨਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੰਦਾ ਟਿਕਦਾ ਨੀਂ
ਤੂੰ ਬਦਲਾਂ ਤੇ ਅਸੀਂ ਵੀ ਬਦਲ ਗਏ
ਹੁਣ ਸਾਡੀ ਅੱਖ ਤੋਂ ਵੀ ਹੰਝੂ ਰਿਸਦਾ ਨੀ

ਬੱਸ ਹੁਣ ਇੱਕ ਹੋਰ ਸ਼ਾਇਰੀ ਕਹਾਂਗਾ

ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵੀ ਇਸ ਦਿਲ ਨੇ ਦਿਲ ਤੋਂ ਕਿਤਾ
ਓਹ ਲੋਕ ਬਾਹਲ਼ੇ ਸਿਆਣੇ ਨਿਕਲ਼ੇਂ
ਛੱਡ ਸਾਨੂੰ ਖੇਡਗੇ ਚਲਾਕੀਆਂ ਸਾਰੀ
ਓਹਣਾ ਲਈ ਪਤਾਂ ਲਗੀਆ ਏਹ ਖੇਡ ਪੁਰਾਣੇਂ ਨਿਕਲ਼ੇਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷

Title: Hawawa warga || punjabi kavita

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


आगरा कौन सा रास्ता जाता है? || birbal akbar story

बादशाह अकबर को शिकार करना बहुत पसंद था। एक बार की बात है, बादशाह अकबर अपने सैनिकों के साथ शिकार पर निकले। शिकार करते-करते वो इतने आगे चले गए कि वो अपने दल से छूट गए। उनके साथ बस कुछ ही सैनिक रह गए थे। अब शाम होने को थी और सूरज ढलने वाला था। साथ ही अकबर और उनके साथ के सैनिकों को भूख भी सताने लगी थी।

बादशाह अकबर को शिकार करना बहुत पसंद था। एक बार की बात है, बादशाह अकबर अपने सैनिकों के साथ शिकार पर निकले। शिकार करते-करते वो इतने आगे चले गए कि वो अपने दल से छूट गए। उनके साथ बस कुछ ही सैनिक रह गए थे। अब शाम होने को थी और सूरज ढलने वाला था। साथ ही अकबर और उनके साथ के सैनिकों को भूख भी सताने लगी थी

काफी दूर निकल आने पर बादशाह अकबर को यह एहसास हुआ कि वो रास्ता भटक गए हैं। वहां आस-पास कोई नजर भी नहीं आ रहा था, जिससे रास्ते के बारे में पूछा जा सकता था। थोड़ी दूर और चलने पर उन्हें एक तिराहा नजर आया। बादशाह को यह देख कर थोड़ी खुशी हुई कि चलो इनमें से कोई न कोई रास्ता राजधानी तक तो जाता ही होगा।

लेकिन, सभी इसी उलझन में थे कि किस रास्ते पर चला जाए। तभी सैनिकों की नजर सड़क किनारे खड़े एक छोटे से लड़के पर पड़ी। वह लड़का बड़ी हैरानी से महाराज के घोड़े और सैनिकों के हथियारों को देख रहा था। सैनिकों ने उस बालक को पकड़कर महाराज के सामने पेश किया।

बादशाह अकबर ने लड़के से पूछा, “ऐ लड़के। इनमें से कौन सा रास्ता आगरा जाता है?” यह बात सुनकर वह बच्चा जोर-जोर से हंसने लगा। यह देखकर राजा को बहुत गुस्सा आया। लेकिन, उन्होंने शांत भाव से उससे उसकी हंसी का कारण पूछा। लड़के ने जवाब दिया, “यह रास्ता चल नहीं सकता है, तो यह आगरा कैसे जाएगा। आगरा पहुंचने के लिए तो आपको खुद चलना पड़ेगा।”

महाराज उस लड़के की सूझबूझ को देख कर चकित रह गए। उन्होंने प्रसन्न होकर उस बच्चे का नाम पूछा। लड़के ने जवाब में अपना नाम महेश दास बताया। महाराज ने उसे इनाम में सोने की अंगूठी दी और दरबार में आने का न्योता दिया। इसके बाद बादशाह अकबर ने लड़के से पूछा, “क्या तुम मुझे बता सकते हो कि किस रास्ते पर चलने से मैं आगरा पहुंच पाऊंगा?” लड़के ने बड़ी ही शालीनता से सही रास्ता बताया और महाराज अपने सैनिकों के साथ आगरा की ओर चल पड़े।

यही लड़का बड़ा होकर बीरबल के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक कहलाया।

Title: आगरा कौन सा रास्ता जाता है? || birbal akbar story


Mehnat || hindi poetry || मेहनत पर कविता

आज गया  ऐसे ही
कल भी चला जायेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू  कुछ नही कर पायेगा|

दुःख है आज जिंदगी मे तेरे
कल सुख भी पायेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू कुछ नही कर पायेगा|

साथी पहुंच जायेगे बहुत आगे 
तू पीछे ही रह जायेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू  कुछ नही कर पायेगा|

समय बितता जायेगा
तू सोचता ही रह जायेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू  कुछ नही कर पायेगा|

जिंदगी के सभी सपने
मेहनत से ही पुरे कर पायेगा 
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू कुछ नही कर पायेगा|

आज मेहनत करेगा तभी
कल मेहनत का  फल पायेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू कुछ नही कर पायेगा|

जब शरीर मे जान ही नही बचेगी
तब क्या मेहनत करेगा
आज गया  समय ऐसे ही
 कल तो तू ही चले जायेगा 
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू कुछ नही कर पायेगा|

जब कुछ नही कर पायेगा तो
किस्मत को जिम्मेवार ठहरायेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू  कुछ नही कर पायेगा|

मेहनत कर ऐ इंसान तू अब
कब तक ऐसे बैठे रहेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू  कुछ नही कर पायेगा|

गरीब है अगर तू आज
कल अमीर बन जायेगा| 
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू  कुछ नही कर पायेगा|

कब तक  परिवारवालो की
मेहनत की रोटी तू खायेगा
एक दिन तू जरूर पछतायेगा
बिना मेहनत करें ऐ इंसान
तू  कुछ नही कर पायेगा|

मेहनत कर ऐ इंसान
तू आगे ही बढ़ता जायेगा
दुनिया के नजरों मे एक दिन  
सफल इंसान बन जायेगा|

अब सुन ऐ इंसान एक बात आज
जब तक नही निकालेगा अपने
अंदर के आलस को तू बाहर
तब तक मेहनत करने से
कतरायेगा तू हर बार|

कामयाब वही होते है
जो कुछ कर दिखाते है
वरना सोचता तो हर इंसान है|
सोच मे तो ऐ इंसान तू बैठे-बैठे
 बडे बडे सपने देख लेता है
 जब मेहनत करने समय आता है
 तो सपनो को  दो मिनट मे तोड़ देता है|
सपने ऐसे देख जिसको तू पूरा कर सके
ऐसे सपने ही क्यों देखने जिनको
पाने की तू हिम्मत ही न रख सके |

कितने आये जिंदगी मे
ओर कितने चले गये
नाम उनका ही रहा
जो कुछ करके दिखा गये|

वो सोचते थे जो भी 
उसको पूरा करके दिखाते थे
उनका मुँह नही  बोलता था
काम बोलके दिखाता था |

मेहनत करके ऐ इंसान
जब तू इस जिंदगी से जायेगा
तेरा नाम रहेगा इस दुनिया मे
ओर तू अमर कहलायेगा.

Title: Mehnat || hindi poetry || मेहनत पर कविता