सरगोशियां हवाओ की सुनी जो कानो ने।
गुफ्तगू तेरी सुनी थी खामोश अफसानो ने।
मुस्कराना तेरा तो,एक दिलनशीं अदा थी।
ज़रा सुन भी लेते कहा क्या है ,दीवानो ने।
वो लचक जाना ,तेरी कमर का चलते चलते।
खुली लूट मची थी मनचलों के ख़जानो मे..
सरगोशियां हवाओ की सुनी जो कानो ने।
गुफ्तगू तेरी सुनी थी खामोश अफसानो ने।
मुस्कराना तेरा तो,एक दिलनशीं अदा थी।
ज़रा सुन भी लेते कहा क्या है ,दीवानो ने।
वो लचक जाना ,तेरी कमर का चलते चलते।
खुली लूट मची थी मनचलों के ख़जानो मे..
उसने जी भर के मुझे चाहा था,
और फिर उसका जी ही भर गया💔
Usne ji bhar ke mujhe chaha tha
Aur fir uska ji hi bhar gya💔
Girte patton se shakhon ke berang nazare hain
Lehron ki khanak sunne ko betaab kinare hain
Murjha gayi hain kaliyan bhi do boond pani ki aas mein
Mitti ki khoobsurti ab bejaan foolon ne saware hain…💯
गिरते पत्तों से शाखों के बेरंग नज़ारे हैं,
लहरों की खनक सुनने को बेताब किनारे हैं,
मुरझा गई हैं कलियाँ भी दो बूँद पानी की आस में,
मिट्टी की खूबसूरती अब बेजान फूलों ने सवारे हैं…💯