यदि मनुष्य कुछ सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल कुछ न कुछ सीखा देती है ।”
सौभाग्य भी उसी को मिलता है, जिसने अपने आप को उस काबिल बनाया है।”
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते ।”
यदि मनुष्य कुछ सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल कुछ न कुछ सीखा देती है ।”
सौभाग्य भी उसी को मिलता है, जिसने अपने आप को उस काबिल बनाया है।”
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते ।”
तू बन दूध सा कोरा , मै बन पत्ती तुझमें मिल जाऊंगी
तू बन इत्र सा मेरा , में हवा बन घुल जाऊंगी
आएगा जो जिक्र तेरा , मै लाली लाके सरमाऊंगी
तू बन के आना बारिश , मै रंगों सी बिखर जाऊंगी।❤️