Skip to content

Hindi true lines || best Hindi thoughts

Vanvaas mein virah ka dard urmila se pucho,
sita se puchoge to dharm hi btayengi
Prem ka arth radha se pucho,
Rukmani se puchoge to adhikar hi btayengi
Sewa ka mtlb shrawan Kumar se pucho,
Hanuman ji se puchoge to anand hi btayenge
Aur zehar ka swaad shiv ji se pucho,
Meera se puchoge to amrit hi btayegi!!

वनवास में विरह का दर्द उर्मिला से पूछो,
सीता से पूछोगे तो धर्म ही बतायेंगी
प्रेम का अर्थ राधा से पूछो,
रुक्मणि से पूछोगे तो अधिकार ही बतायेंगी
सेवा का मतलब श्रवण कुमार से पूछो,
हनुमान जी से पूछोगे तो आनंद ही बताएंगे
और ज़हर का स्वाद शिव जी पूछो,
मीरा से पूछोगे तो अमृत ही बतायेंगी!!

Title: Hindi true lines || best Hindi thoughts

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Hindi shayari || two line shayari || rishte shayari

Rishte nibhane na ho to ban jao tum raqeeb
Do rang ke chehre mujhe acche nhi lagte..💯

रिश्ते निभाने न हो तो बन जाओ तुम रकीब
दो रंग के चेहरे मुझे अच्छे नहीं लगते 💯

Title: Hindi shayari || two line shayari || rishte shayari


याद है ना तुम्हें || hindi poetry

याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।

तुम्हारे गुजरे पलों में बेशक मैं नहीं थी
तुम्हारे संग भविष्य की अपेक्षा भी नहीं थी
हां,वर्तमान के कुछ चंद क्षण
साझा करने की ख्वाहिश जरुर थी।

याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।

देखो, आज फिर उंगलियों ने मेरी
कलम उठाई है
कुछ अनसुनी भावनाओं को संग अपने
समेट लाई है
माना ,मेरे शब्दों ने आहत किया तुम्हें
लेकिन क्या,असल भाव को पहचाना तुमने?

याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।

उलझ गए तुम निरर्थक शब्दों में
पढ़ा नहीं जो लिखा है कोमल हृदय में
चल दिए छोड़ उसे, तुम अपनी अना में
बंधे थे हम तुम, जिस अनदेखे रिश्ते की डोर में

याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।

बीत गए कई बारिश के मौसम
क्या धुले नहीं, जमे धूल मन के?
है अर्जी मेरी चले आओ तुम
मेरे भीतर के तम को रोशनी दिखाओ तुम..

याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।

Title: याद है ना तुम्हें || hindi poetry