वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
Enjoy Every Movement of life!
वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
ये रिश्तों के सिलसिले
इतने अजीब क्यों हैं,
जो हिस्से नसीब में नहीं
वो दिल के करीब क्यों हैं,
ना जाने कैसे लोगों को
मिल जाती है उनकी चाहत,
आख़िर किस से पूछे
हम इतने बदनसीब क्यों हैं।
Menu sirf zaroorta vele yaad na kareya kar,
Galatfehmi ho jandi e kite mein khuda taan nahi!
ਮੈਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਜਰੂਰਤਾਂ ਵੇਲੇ ਯਾਦ ਨਾ ਕਰਿਆ ਕਰ,
ਗਲਤਫ਼ਹਿਮੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਐ ਕਿਤੇ ਮੈਂ ਖੁਦਾ ਤਾਂ ਨਹੀਂ!