वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
Enjoy Every Movement of life!
वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
Jagna v kabool saanu teriyaan yaadan vich raat bhar
ehna ehsaasan ch jo sakoon, neenda ch oh kithe
ਜਗਨਾ ਵੀ ਕਬੂਲ ਸਾਨੂੰ ਤੇਰੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਵਿੱਚ ਰਾਤ ਭਰ
ਇਹਨਾਂ ਅਹਿਸਾਸਾਂ ‘ਚ ਜੋ ਸਕੂਨ, ਨੀਂਦਾ ਵਿੱਚ ਓ ਕਿੱਥੇ
हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...