वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
Girte patton se shakhon ke berang nazare hain
Lehron ki khanak sunne ko betaab kinare hain
Murjha gayi hain kaliyan bhi do boond pani ki aas mein
Mitti ki khoobsurti ab bejaan foolon ne saware hain…💯
गिरते पत्तों से शाखों के बेरंग नज़ारे हैं,
लहरों की खनक सुनने को बेताब किनारे हैं,
मुरझा गई हैं कलियाँ भी दो बूँद पानी की आस में,
मिट्टी की खूबसूरती अब बेजान फूलों ने सवारे हैं…💯
आंखें अगर कमजोर होती तो शायद दिल ना लगाते..
जब देख ही नहीं पाते, तो उनसे यूंही थोड़ी ना मिल जाते..
ना उनके चेहरे का दीदार होता, ना आँखों में डूब जाते..
ना आज गमों में होते, ना खुद को मुश्किल में पाते..