वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
Enjoy Every Movement of life!
वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
मौसम बदल रहा है, राहें बदल रही हैं,
हवाओं का रुख तो देखो के सांसें बदल रही है,
बदल रहे हैं चेहरे और तस्वीरें बदल रही हैं,
दुआओं में शरीक नहीं पर तकदीरें बदल रही हैं,
बदल रही है नींदें और रातें बदल रही हैं,
करवटों से ज़्यादा अब बातें बदल रही हैं,
छिन जाएगा सबकुछ गर यादें बदल रही हैं,
हवाओं का रुख तो देखो के सांसें बदल रही है...