वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।
वो भी हमको मिल गया है क्या सितम है,
ग़म ही ग़म है क्या ही क्या है क्या सितम है।
देख ले इक मर्तबा तेरी तरफ़ जो,
रात दिन मांगे दुआ है क्या सितम है।
ज़िंदगी मेरी कहीं बस बीत जाए
बे वफ़ा तो हो गया है क्या सितम है।
इश्क़ तेरा अब जहर सा हो गया है,
वो जहर ही अब दवा है क्या सितम है।
आज कल घर से निकलते ही नहीं हो,
यार तुमको क्या हुआ है क्या सितम है।
Vo tere khat teri tasveer aur sukhe phool,
Bhut udaas karti hain mujhko nishaniyan teri😑
वो तेरे खत तेरी तस्वीर और सूखे फूल,
बहुत उदास करती हैं मुझको निशानियाँ तेरी।😑