Scenery is fine but human nature is finer.
Enjoy Every Movement of life!
Scenery is fine but human nature is finer.
क्या वक्त ये मेरे दरमियां है,
किसी ने बताया नहीं मुझमें क्या कमियां है,
शाम की खुशियों में गम का अंधेरा क्यूं लाएं,
आज दिल की सुनकर बाहर निकला जाए...
कैद कर लिया है खुद को इन बेड़ियों में,
क्या फर्क है अब मुझमें और कैदियों में,
इन अंजान गलियों में आज थोड़ा फिसला जाए,
आज दिल की सुनकर बाहर निकला जाए...
mere dil vich kade us kamli da ghar c
jo ajh gairaa diyaa kothiyaa vich rehndi e
ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਕੱਦੇ ਓਸ ਕਮਲੀ ਦਾ ਘਰ ਸੀ
ਜੋ ਅੱਜ ਗੇਰਾ ਦੀਆ ਕੋਠੀਆ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦੀ ਏ