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प्यार ,रिश्ता और जिंदगी || pyar hindi
प्यार और रिश्ता दो अलग शब्द हैं लेकिन अगर एक साथ ये दो शब्द किसी के जिंदगी में मिल जाये तो समझो उसकी जिंदगी ज़न्नत में कटेगी।मेरा मानना हैं कि प्यार एक एहसास है जो वक़्त के साथ साथ चलती है पर रिश्ता वक़्त के साथ बदल जाती है । आज के लोग रिश्ता को ही प्यार समझ बैठते हैं और जब ये बदलता है तो वो अकेला अहसहाय महसूस करने लगते हैं । इसका कारण एक ये भी है कि वो जिंदगी का गोल्डन पीरियड वो उस शख्श को दे बैठते है जिन्होंने कभी सच मे प्यार नही किया । वो तो सिर्फ और सिर्फ रिश्ता निभाने के फिराक में था । इसकी मुख्य वजह है आज के इंटरनेट वाली दुनिया । कहने को तो इंटरनेट लोगो के करीब लाने का जरिया हैं पर मेरे नजर में तो ये करीब लाकर भी दिल के बीच दूरियां बढ़ाने का साधन है। आप एक उदाहरण से ही समझिये । आज के सोशल साइट पर कई लोगो को हज़ारो फ्रेंड होंगे।पर जब बात दिल से लाइक करने को होती है तो गिने चुने लोग ही (मेरे नजर में न के बराबर लोग) तुमको सच में लाइक करते होँगे। ज्यादातर लोग तुम्हारे फ़ोटो पर लाइक और कमेंट ये चलते करते होंगे ताकि तुम उसके फोटो को लाइक करो । अगर साधारण भाषा मे कहे तो ये लोग प्यार किसी और से कर रहे हैं तो रिश्ता किसी और से निभा रहे हैं । ये बनाबटी दुनिया हैं दोस्त । यंहा रिश्ते दिल से नही दिमाग से किये जाते है। आज कल के लोग इतने तेज हो गए हैं कि एक ही समय पर फ़ोन पर बात आपसे करते होंगे तो व्हाट्सएप किसी और से। जितना फ़ास्ट इंटरनेट होते जा रहा है उससे ज्यादा फ़ास्ट आज के लोग और उनकी सोच। मेरे हिसाब से जिंदगी चलने का नाम है जिस दिन रुक गए समझिये उस दिन मर गए ।इसलिए बस यूं ही समझिये जो आया था उसका किरदार इतना ही तक था और जो आएगा उसका भी किरदार कुछ न कुछ लिखा ही होगा । इन सब पर ही मैंने एक कविता लिखी हैं।
जिसे मैं अपना समझा था,वो किसी और का निकला ।
रिश्ते की बाते मुझसे करता था पर प्यार किसी और का निकला।
कसमे वादे मुझसे करता था पर निभाते वक़्त कोई और निकला
रोने में तो बहुत आंसू बहाये, पर आंसू भी घड़ियाल का निकला।।
ये ढोंग की दुनिया है दोस्त, खुद से प्यार करना सीखो
अकेले आये थे अकेले जाओगे,जिंदगी में खुशहाल रहना सीखो। !
धन्यवाद
लेखक :- ललन राज
Title: प्यार ,रिश्ता और जिंदगी || pyar hindi
Birbal story in hindi
बीरबल कहाँ मिलेगा
एक दिन बीरबल बाग में टहलते हुए सुबह की ताजा हवा का आनंद ले रहा था कि अचानक एक आदमी उसके पास आकर बोला, “क्या तुम मुझे बता सकते हो कि बीरबल कहां मिलेगा ?”
“बाग में।” बीरबल बोला।
वह आदमी थोड़ा सकपकाया लेकिन फिर संभलकर बोला, “वह कहां रहता है ?”
“अपने घर में।” बीरबल ने उत्तर दिया।
हैरान-परेशान आदमी ने फिर पूछा, “तुम मुझे उसका पूरा पता ठिकाना क्यों नहीं बता देते ?”
“क्योंकि तुमने पूछा ही नहीं।” बीरबल ने ऊंचे स्वर में कहा।
“क्या तुम नहीं जानते कि मैं क्या पूछना चाहता हूं ?” उस आदमी ने फिर सवाल किया।
“नहीं।’ बीरबल का जवाब था।
वह आदमी कुछ देर के लिए चुप हो गया, बीरबल का टहलना जारी था। उस आदमी ने सोचा कि मुझे इससे यह पूछना चाहिए कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ? वह फिर बीरबल के पास जा पहुंचा, बोला, “बस, मुझे केवल इतना बता दो कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ?” “हां, मैं जानता हूं।” जवाब मिला।
“तुम्हारा क्या नाम है ?” आदमी ने पूछा।
“बीरबल।” बीरबल ने उत्तर दिया।
अब वह आदमी भौचक्का रह गया। वह बीरबल से इतनी देर से बीरबल का पता पूछ रहा था और बीरबल था कि बताने को तैयार नहीं हुआ कि वही बीरबल है। उसके लिए यह बेहद आश्चर्य की बात थी।
“तुम भी क्या आदमी हो…” कहता हुआ वह कुछ नाराज सा लग रहा था, “मैं तुमसे तुम्हारे ही बारे में पूछ रहा था और तुम न जाने क्या-क्या ऊटपटांग बता रहे थे। बताओ, तुमने ऐसा क्यों किया ?”
“मैंने तुम्हारे सवालों का सीधा-सीधा जवाब दिया था, बस !”
अंततः वह आदमी भी बीरबल की बुद्धि की तीक्ष्णता देख मुस्कराए बिना न रह सका।
