
Hun ki kise nu kehana ni
Eh ishq ta ikk khel hai
Sareya ne khelde rehna ni
Ikk baazi layi c mai v haar gya
Iss ishq di kataar ch Arsh
ne ta akhir vich hi rehna c

कांटों से लिपट कर हम सो गए ,
वो फूलों पर करवट बदलते रहे,
वो सोए रहे सुकून से मखमली बिस्तर पर
और हम चिराग की तरह जलते रहे,,
अरे वो तो कब का छोड़ चुके थे मेरा साथ बीच रस्ते में,
और एक हम थे कि वो मेरे साथ है ये सोच कर बस चलते रहे,,
मैं तो हर मोड़ पर साथ था उनके, बचाता रहा उन्हें हर ठोकरों से,
और एक वो है जो मुझे ठोकर मारा कर चले गए, और हम खुद ही गिरते रहे संभलते रहे,,
फिर भी मुझे कोई गिला नहीं, कोई शिकवा नहीं,
हो जाए अगर मुकम्मल इश्क तो फिर वो इश्क ही क्या, ओर इश्क का मजा ही क्या,
यारो इश्क का मजा तो तब है जब दर्द मिलते रहे और दिल जलते रहे, दर्द मिलते रहे और दिल जलते रहे।।
नितीश कुमार ✍️
Haal-e-mohabbat ko dekhte huwe iss daur se faraar chahta,
Soorat ko najar andaj kar main seerat se Talluqaat chahta hun.
Bewafai,behayai,behudagi, kya kya nahi hai iss jamane mein,
Inn sabse door jaa kar main bhi kisi se wafayen pyaar chahta hun.🥰
हाल-ए-मोहब्बत को देखते हुवे इस दौर से फरार चाहता हूं,
सूरत को नजर अंदाज कर मैं सीरत से ताल्लुकात चाहता हूं।
बेवफाई,बेहयाई,बेहूदगी,क्या क्या नही है इस जमाने में,
इन सबसे दूर जाकर मैं भी किसी से वफाएं प्यार चाहता हूं ।।🥰