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IK SAAL

Ravaan tediyaan mediyaan chon langhde langhde ik din ghumhi hoi manzil labh jawegi hauli hauli langh gya ik saal bin tere puri zindagi v langh jawegi

Ravaan tediyaan mediyaan chon langhde langhde
ik din ghumhi hoi manzil labh jawegi
hauli hauli langh gya ik saal bin tere
puri zindagi v langh jawegi


Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Camel ki gardan || akbar birbal kahani

अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?

एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?

बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”

तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।

और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।

Title: Camel ki gardan || akbar birbal kahani


Shayari mein hunar || Urdu Ghazal or Shayari

HUM TO BAS SHAYARI MAIN IS QADAR HUNAR RAKHTE HAIN

RAKH DETE JO QADAM MEHFIL MAIN LOG APNI QALAM CHCHODH DETE HAIN

  ہم تو بس شاعری میں اس قدر ہنر رکھتے ہیں
رکھ دیتے جو قدم محفل میں لوگ اپنی قلم چھوڑ دیتے ہیں

Title: Shayari mein hunar || Urdu Ghazal or Shayari