
Ohna mud ke nahi auna intezaar na kareya kar..!!

ਤੇਰੇ ਲਈ ਲਿਖੀ ਹੈ ਇੱਕ ਸ਼ਾਇਰੀ
ਮੈਨੂੰ ਮਿਲ਼ੀ ਕਦੇ ਤੈਨੂੰ ਫੇਰ ਸੁਣਾਵਾਂਗਾ
ਤੈਨੂੰ ਲਗਦਾ ਨਹੀਂ ਪਰ ਮੇਰੀ ਰੂਹ ਤੇ ਲਿਖਿਆ ਏਂ ਨਾ ਤੇਰਾਂ
ਇੱਕ ਦਿਨ ਦੇਖੀਂ ਜ਼ਰੂਰ ਤੂੰ ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਮੈਂ ਮਰ ਜਾਵਾਂਗਾ
“थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…
मैंने चलना ही छोड़ दिया है।
फासलें अक्सर रिश्तों में…
अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने..
अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है।
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ…
खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने…
अपनापन ही छोड़ दिया है।
याद तो करता हूँ मैं सभी को… और परवाह भी करता हूँ सब की, पर कितनी करता हूँ… बस, बताना छोड़ दिया है।।”